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चंडीगढ़ में मृत पूर्व MLA का नाम FIR से हटाया:पुलिस ने गलती मानी; परिवार की आपत्ति के बाद रिकॉर्ड सुधारा, एक भी गिरफ्तारी नहीं

चंडीगढ़ , (PNL) : चंडीगढ़ में अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR में मृत पूर्व विधायक अजैब सिंह मुखमैलपुर का नाम शामिल करने के मामले में पुलिस ने गलती मान ली है। रिकॉर्ड की दोबारा जांच के बाद पुलिस ने दस्तावेजों में सुधार कर दिया और पूर्व विधायक का नाम FIR से हटा दिया। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान हुई गलती के कारण उनका नाम रिकॉर्ड में शामिल हो गया था। अजैब सिंह मुखमैलपुर का करीब दो साल पहले 75 वर्ष की उम्र में निधन हो चुका है। वह शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता थे। 1997 में वह घनौर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। बाद में पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।

मृत पूर्व विधायक का नाम FIR में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद उनके परिवार ने कड़ी आपत्ति जताई थी। परिवार का कहना था कि किसी व्यक्ति को FIR में नामजद करने से पहले उसकी पहचान और घटना के समय मौके पर मौजूदगी की पुष्टि की जानी चाहिए। परिजनों ने पुलिस की इस लापरवाही की निंदा भी की थी। वहीं, पुलिस ने अब मामले की दोबारा जांच कर दस्तावेजों में जरूरी सुधार कर दिया है। प्रदर्शन से जुड़े मामले में अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

अमृतपाल सिंह के पिता का नाम FIR से गायब

पुलिस की कार्रवाई पर दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि प्रदर्शन की अगुआई करने वाले खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह का नाम FIR में शामिल नहीं है। प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया है। वहीं, चंडीगढ़ पुलिस ने अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के दाखा से विधायक मनप्रीत अयाली, सतिंदरजीत सिंह गिल, काबल सिंह भुल्लर, जगदीप सिंह, इकबाल सिंह संधू, परमजीत सिंह जौहल, चमकौर सिंह धुन, एडवोकेट इमान सिंह खारा, जसविंदर सिंह ड्रोली, इकबाल सिंह, लक्खा सिधाना, भाना सिद्धू और लखबीर सिंह लक्खा समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

पुलिस बैरिकेड तोड़कर सीएम आवास के करीब पहुंचे

प्रदर्शनकारी खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह और बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर चंडीगढ़ पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी से करीब एक किलोमीटर दूर तक पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और सुरक्षा घेरा पार करते हुए आगे बढ़ गए। प्रदर्शनकारियों ने वाटर कैनन पर भी कब्जा कर लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी की गई।

पहले से घोषित प्रदर्शन, फिर भी नहीं रोक पाई पुलिस

यह प्रदर्शन पहले से घोषित था, इसके बावजूद चंडीगढ़ पुलिस प्रदर्शनकारियों को पंजाब-चंडीगढ़ सीमा पर रोकने में नाकाम रही। प्रदर्शनकारी शहर में दाखिल होकर कई किलोमीटर आगे तक पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ी और मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के नजदीक पहुंचकर प्रदर्शन किया।

अब मृत पूर्व विधायक का नाम FIR में शामिल करने और प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर चंडीगढ़ पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के सामने एक ओर FIR में हुई गलती को सुधारने का मामला है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों के बड़ी संख्या में शहर में दाखिल होने और मुख्यमंत्री आवास के करीब पहुंचने की सुरक्षा चूक की जांच की चुनौती भी है।

जानिए, कैसे फेल होती गई पुलिस की पूरी प्लानिंग…

  • चंडीगढ़-मोहाली पुलिस की जॉइंट मीटिंग में प्लानिंग: अकाली दल (वारिस पंजाब दे) संगठन ने सीएम पंजाब की चंडीगढ़ स्थित सरकारी कोठी के घेराव की कॉल पहले ही दे दी थी। उसी हिसाब से चंडीगढ़ व पंजाब पुलिस की जॉइंट मीटिंगें भी हुई थीं। इतना ही नहीं, दोनों ने मिलकर धरने का रूट प्लान भी तैयार किया था। इसी के चलते चंडीगढ़ पुलिस ने एक दिन पहले गऊशाला चौक पर नाकेबंदी कर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी थी।

  • मोहाली पुलिस ने नहीं रोका, उल्टा बॉर्डर पर छोड़ा: सूत्रों की मानें तो चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस की मीटिंग में तय था कि इन्हें आगे नहीं जाने दिया जाएगा। कुछ प्रदर्शनकारियों को मोहाली के इलाके में रोक लिया जाएगा। हुआ बिल्कुल विपरीत। मोहाली पुलिस उनको बॉर्डर तक छोड़कर आई। जैसे ही बॉर्डर पार किया, मोहाली पुलिस पीछे हट गई और प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में दाखिल हो गए।

  • पहली बैरिकेडिंग पर फोर्स कम थी: सेक्टर-45 गोशाला चौक पर चंडीगढ़ पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के मुकाबले में पुलिस बल कम था। इस चीज का अंदाजा प्रदर्शनकारियों को हो गया था। उन्होंने सबसे पहले वाटर कैनन पर कब्जा किया। उसके बाद 2 मिनट में नाके तोड़ आगे बढ़ गए।

  • दूसरी जगह बैरिकेडिंग ही नहीं की: हैरानी की बात ये है कि चंडीगढ़ पुलिस की प्लानिंग इस कदर कमजोर थी कि गोशाला चौक से लेकर CM की सरकारी कोठी तक कहीं दूसरी जगह बैरिकेडिंग ही नहीं की गई थी। चंडीगढ़ पुलिस ये समझने में चूक गई कि ये लोग आगे भी जाएंगे। आम प्रदर्शनकारियों की तरह पुलिस को लगा कि उनके पहले ही बैरिकेड पर सबको रोक देंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और प्रदर्शनकारी आराम से आगे बढ़ते चले गए।

  • भीड़ को कंट्रोल नहीं कर पाए नेता: प्रदर्शन को लेकर संगठन के नेता MLA मनप्रीत अयाली ने कहा था कि हम यहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे, कोई तोड़फोड़ नहीं लेकिन ऐसा हुआ नहीं। प्रदर्शनकारियों ने गोशाला चौक पर पुलिस की पहली ही बैरिकेडिंग तोड़ दी। पुलिस वालों से भिड़ गए और वाटर कैनन तक कब्जा लिया। इसे नेता संभाल नहीं सके। इसके बाद युवा प्रदर्शनकारी बिना किसी लीडरशिप के तेजी से आगे बढ़ते चले गए। विधायक मनप्रीत सिंह अयाली हूटर बजाते हुए सबसे आगे पहुंचे और लेबर चौक पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी।

  • आखिर में सांसद के पिता ने मोर्चा संभाला: इसके बाद सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने कमान संभाली। सेक्टर-20 और 21 के इनर मार्ग पर खुद बीच रास्ते में गाड़ी रोककर उसके ऊपर खड़े हो गए और माइक से आगे न बढ़ने की अनाउंसमेंट करने लगे। तब तक 200 प्रदर्शनकारी पहले ही आगे बढ़ चुके थे। इसको देखते हुए वह भी गाड़ी से आगे बढ़े और प्रदर्शनकारियों से पहले सेक्टर-7 और 8 के चौक पर पहुंच गए। वहां पर पुलिस ने ह्यूमन चेन बना रखी थी।

  • फिर पुलिस ने मौके पर बदली रणनीति: जब प्रदर्शनकारी बड़ी तेज गति से आगे बढ़ रहे थे, तो पुलिस को भी यह डर था कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री की कोठी तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद पुलिस ने अपनी रणनीति बदली। आला अधिकारी मुख्यमंत्री हाउस को सिक्योर करने में लग गए और मुख्यमंत्री आवास के अधिकारियों को गंभीरता से अवगत करवाया। इसके बाद तुरंत मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरिंदर बराड़ को सेक्टर-7/8 चौक पर ही ज्ञापन लेने के लिए बुला लिया।

  • आखिर में प्रदर्शनकारी कम होते चले गए तो कंट्रोल हुआ: यहां से सीएम आवास तीन किलोमीटर दूर था। इससे आगे का इलाका वीवीआईपी था। ज्ञापन लेने के बाद पुलिस शांत हो गई कि अब यह वापस चले जाएंगे। पुलिस ने ह्यूमन चेन तोड़कर साइड कर दी। इसी का फायदा उठाकर 50 से अधिक प्रदर्शनकारी इस चौक से विज्ञान पथ तक बढ़ गए। दो चौक क्रॉस कर वह पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर वाले चौक पर पहुंच गए, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती गई। पुलिस ने वहां से इन्हें मोहाली रवाना कर दिया।

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