चंडीगढ़ कोर्ट बोला- एक गलती से कोई आदतन अपराधी नहीं:6 साल का रिकॉर्ड गिनाया; जेल वाली अवधि पूरी सजा, हेरोइन बरामदगी मामले में राहत
Punjab News Live -PNL
October 3, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, पंजाब
चंडीगढ़ , (PNL) : चंडीगढ़ में हेरोइन बरामदगी मामले में दोषी ठहराए गए युवक को NDPS एक्ट की स्पेशल कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने उसे दोबारा जेल भेजने के बजाय पहले ही बिताई अवधि को उसकी पूरी सजा मान लिया। 6 साल तक नियमित रूप से कोर्ट में पेश होने, किसी दूसरे अपराध में शामिल नहीं होने और खुद को सुधारने के प्रयासों को अदालत ने आधार बनाया। जज रमन गोखलेनी ने कहा कि एक गलती के आधार पर किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता। आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सुधारकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है। अदालत ने अबिनाश के पिछले छह साल के आचरण को विशेष रूप से ध्यान में रखा।
कोर्ट ने क्या कहा विस्तार से पढ़िए…
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किसी भी सुनवाई से बचने की कोशिश नहीं की: कोर्ट के मुताबिक वह मामले की सुनवाई के दौरान लगातार नियमित रूप से पेश होता रहा। उसने किसी भी सुनवाई से बचने की कोशिश नहीं की। न ही किसी तारीख पर गैरहाजिर रहा। इतने लंबे समय तक केस चलने के बावजूद उसके खिलाफ किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल होने की बात सामने नहीं आई।
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अबिनाश ने अपने व्यवहार में सुधार किया: अदालत ने माना कि इस अवधि में अबिनाश ने अपने व्यवहार में सुधार किया। उसने ईमानदारी से काम किया और सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश की। कोर्ट के सामने ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं था, जिससे यह साबित हो कि वह नशीले पदार्थों की बिक्री, सप्लाई या तस्करी में शामिल रहा हो।
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आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता: जज रमन गोखलेनी ने टिप्पणी की कि अबिनाश से यह गलती कम उम्र में हुई थी। केवल इस एक घटना के आधार पर उसे आदतन अपराधी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के पूरे आचरण को केवल एक आपराधिक मामले के आधार पर तय नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब वह बाद के वर्षों में अपराध से दूर रहा हो।
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सुधारने का अवसर देना उद्देश्य: अदालत ने यह भी कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोषी व्यक्ति को सुधारने का अवसर देना और उसे समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। इस मामले में पिछले छह वर्षों के दौरान अबिनाश का व्यवहार इस दिशा में उसके प्रयास को दिखाता है।
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सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है: बिनाश ने अदालत के सामने अपने भविष्य को लेकर भी पक्ष रखा। उसने बताया कि वह अविवाहित है और सरकारी नौकरी हासिल करना चाहता है। उसका कहना था कि अगर उसे अब दोबारा जेल भेजा गया या लंबी सजा भुगतनी पड़ी तो उसके भविष्य पर इसका असर पड़ेगा। उसकी इस दलील को भी अदालत ने ध्यान में रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि अपने आप में उसके भविष्य में रोजगार पाने के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी।
2020 में 54 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था मामला साल 2020 का है। पुलिस ने सेक्टर-23 निवासी अबिनाश को 54 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उसे दोषी करार दिया। इसके बाद जब सजा तय करने की बारी आई तो कोर्ट ने उसके मौजूदा आचरण और पिछले छह वर्षों के रिकॉर्ड को भी देखा।