पूर्व सीएम भूपेश बघेल की पंजाब में बढ़ी चुनौती:सांसद Charanjit Channi मुलाकात के लिए प्रदेश प्रभारी के सामने रखी शर्त
Punjab News Live -PNL
July 10, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, देश विदेश, पंजाब
न्यूज डेस्क, (PNL) : पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच प्रदेश प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की चुनौती बढ़ती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने बघेल से सीधे मुलाकात करने से फिलहाल इनकार कर दिया है।चंडीगढ़ में चार दिन से डटे बघेल लगातार नेताओं से मुलाकात कर संगठन में चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उनका पांच दिन का दौरा अब तीन दिन और बढ़ सकता है।

चन्नी गुट में शामिल पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक भूपेश बघेल के डिनर में पहुंचे। मोहम्मद सदीक ने बकायदा छणकाटा पैंदा गली-गली.. गीत गया। इसके अलावा चन्नी गुट में शामिल रजिया सुल्ताना भी भूपेश बघेल से मिली।
चन्नी ने मुलाकात के लिए रखी दो शर्ते
सूत्रों के मुताबिक, चन्नी गुट ने मुलाकात से पहले दो शर्तें रखी हैं। पहली, बैठक कांग्रेस भवन में नहीं होगी और दूसरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे। चन्नी की ओर से दो प्रतिनिधियों के जरिए बातचीत की पेशकश की गई है, जिसमें सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी शामिल हो सकते हैं।
कांग्रेस हाईकमान के हस्तक्षेप के बावजूद पंजाब में गुटबाजी पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही। हालांकि, चन्नी के बातचीत के लिए तैयार होने से पार्टी नेतृत्व पर बना तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है।
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग ही रहेंगे।
दूसरी ओर, राजा वड़िंग लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते नजर आ रहे हैं। भूपेश बघेल भी पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सभी पक्षों को साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं।
राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहते है चन्नी
बताया जा रहा है कि सांसद चन्नी फिलहाल सीधे प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल से मिलने के बजाय कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात करना चाहते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में किसी भी बड़ी जिम्मेदारी या राजनीतिक फैसले पर अंतिम सहमति राहुल गांधी से ही होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भूपेश बघेल पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को जल्द नहीं सुलझा पाए, तो आने वाले समय में संगठन के भीतर विवाद और गहरा सकता है। ऐसे में पंजाब में कांग्रेस को एकजुट रखना अब बघेल के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है।
