दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर बैन के खिलाफ SGPC का बड़ा प्रदर्शन, अमृतसर में निकाला रोष मार्च
Punjab News Live -PNL
July 10, 2026
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अमृतसर (PNL): फिल्म ‘सतलुज’ पर लगे प्रतिबंध को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने शुक्रवार को अमृतसर में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। श्री हरिमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) परिसर से शुरू हुए विशाल रोष मार्च में एसजीपीसी पदाधिकारियों, सदस्यों और बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
रोष मार्च की अगुवाई एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने की। सूचना केंद्र से शुरू हुआ मार्च जिला प्रशासन के कार्यालय तक पहुंचा, जहां राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया।
‘सतलुज’ पर रोक हटाने की उठाई मांग
मीडिया से बातचीत करते हुए एडवोकेट धामी ने कहा कि फिल्म ‘सतलुज’ भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनकी शहादत और पंजाब के उस दौर की घटनाओं को सामने लाने का प्रयास करती है। उनका कहना था कि सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद फिल्म में आवश्यक बदलाव किए गए और इसे नए नाम ‘सतलुज’ के साथ तैयार किया गया, लेकिन इसके बावजूद इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई।
“नई पीढ़ी को इतिहास जानने का अधिकार”
धामी ने कहा कि पंजाब के कठिन दौर को केवल वही लोग अच्छी तरह समझ सकते हैं जिन्होंने उसे करीब से देखा है। आज की युवा पीढ़ी उस इतिहास से काफी हद तक अनजान है। ऐसे में इस तरह की फिल्में इतिहास को समझने और बीते दौर की सच्चाइयों को जानने का माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने मांग की कि फिल्म पर लगाया गया प्रतिबंध तुरंत हटाया जाए।
14 जुलाई को सतलुज किनारे होगी अरदास
एसजीपीसी अध्यक्ष ने बताया कि विरोध कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे विशेष अरदास की जाएगी, जिसमें फिल्म से प्रतिबंध हटाने और न्याय की मांग को लेकर संगत एकजुट होगी।
“यह सिर्फ फिल्म नहीं, इतिहास का सवाल”
धामी ने कहा कि यह मामला केवल एक फिल्म की रिलीज का नहीं, बल्कि इतिहास और सच्चाई को सामने लाने का है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रही है और सरकार से अपील करती है कि फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दी जाए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने लंबे समय से जेलों में बंद सिख बंदियों का मुद्दा भी उठाया और सरकार से उनके मामलों में मानवीय और न्यायसंगत निर्णय लेने की मांग की।