ऑस्ट्रेलिया के गुरुद्वारे में आग के बाद श्री अकाल तख्त सख्त, जांच टीम भेजने के आदेश
Punjab News Live -PNL
July 27, 2026
अमृतसर, ताजा खबर, पंजाब, होम
अमृतसर (PNL) : ऑस्ट्रेलिया के वर्जीनिया स्थित गुरुद्वारा दशमेश दरबार की इमारत में आग लगने की घटना पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने देश-विदेश में रह रही सिख संगत से गुरुद्वारों की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की अपील करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जत्थेदार ने गुरु साहिब के चरणों में अरदास करते हुए समस्त सिख समुदाय की चढ़दी कला, सुख-शांति और सरबत के भले की कामना की। उन्होंने घटना को गंभीरता से लेते हुए न्यूजीलैंड की सेंट्रल सिख एसोसिएशन के मुख्य सेवादार सरदार दलजीत सिंह को सिख प्रतिनिधियों के एक दल के साथ वर्जीनिया पहुंचकर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
जांच रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपी जाएगी
उन्होंने बताया कि जांच दल गुरुद्वारा दशमेश दरबार में हुए नुकसान का जायजा लेने के साथ यह भी पता लगाएगा कि वहां सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन बीड़ों की स्थिति क्या है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपी जाएगी।
स्थानीय प्रशासन और प्रबंधन से मांगी जाएगी पूरी जानकारी
जत्थेदार ने सरदार दलजीत सिंह को निर्देश दिए हैं कि वे ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के साथ समन्वय स्थापित कर घटना से जुड़ी सभी जानकारियां एकत्र करें। साथ ही गुरुद्वारा प्रबंधन समिति को भी पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय को भेजने के लिए कहा गया है।
पारदर्शी जांच और सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में बसे सिख समुदाय ने श्रद्धा के साथ गुरुद्वारों की स्थापना की है। ऐसे में इन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने वर्जीनिया की सिख संगत से संयम, धैर्य और चढ़दी कला में बने रहने की अपील करते हुए कहा कि आग लगने के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की शरारत या साजिश की आशंका सामने आती है तो उसके हर पहलू की गहन जांच की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। साथ ही गुरुद्वारा दशमेश दरबार का पुनर्निर्माण पूरी श्रद्धा, सम्मान और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाना चाहिए।