Tuesday , April 14 2026
Breaking News

Ludhiana डीईओ एलिमेंटरी के खिलाफ CIC को कंप्लेंट:RTI के तहत नहीं दे रहे सूचनाएं, पब्लिक परेशान; सख्त कार्रवाई की मांग

लुधियाना , (PNL) : पंजाब शिक्षा विभाग सूचना का अधिकार (RTI) कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग के लोक सूचना अधिकारी व फर्स्ट अपीलिएंट अथॉरिटी आवेदकों को सूचनाएं नहीं दे रहे। अफसरों के रवैये से जहां लोगों को सूचनाएं नहीं मिल रही वहीं सूचना आयोग का काम भी बढ़ रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल ने डीईओ एलिमेंटरी के खिलाफ चीफ इंफोर्मेशन कमिश्नर(CIC) को शिकायत दी है। उन्होंने शिकायत में कहा कि अधिकारी कानून के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। चीफ इन्फोर्मेशन कमिश्नर के पास लगानी पड़ रही अपील रोहित सभ्रवाल का कहना है कि उन्होंने शिक्षा विभाग में एक दर्जन से अधिक आरटीआई एप्लीकेशन लगाई हैं, लेकिन आज तक किसी भी एप्लीकेशन का समय पर जवाब नहीं दिया गया। उन्हें बार-बार चीफ इन्फोर्मेशन कमिश्नर के पास अपील लगानी पड़ रही है।

शिकायत में लिखी ये अहम बातें…

जिम्मेदारियां नहीं निभा रहे अफसर: रोहित सभ्रवाल ने कहा कि पीआईओ और फर्स्ट अपीलिएंट अथॉरिटी अपनी उन अनिवार्य जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहे हैं, जो उन्हें RTI अधिनियम 2005 के तहत सौंपी गई हैं। शिकायत में कहा गया है कि अधिकारियों का यह रवैया संसद द्वारा पारित कानून का सीधा अपमान है।

जानबूझकर देरी की रणनीति: विभाग में आरटीआई आवेदनों और प्रथम अपीलों को जानबूझकर लंबे समय तक लटकाया जाता है। इस कारण मजबूर होकर आवेदकों को राज्य सूचना आयोग में अपील दायर करनी पड़ती है।

धारा 7(2) का उल्लंघन: कानून के अनुसार, पीआईओ को 30 दिनों के भीतर मांगी गई जानकारी देनी होती है। लुधियाना शिक्षा विभाग में अधिकांश मामलों में कोई जवाब ही नहीं दिया जाता। धारा 7(2) के तहत, यदि समय सीमा में जवाब न मिले तो इसे ‘डीम्ड डिनायल’ (सूचना देने से इनकार) माना जाता है।

फर्स्ट अपीलिएंट अथॉरिटी पर सवाल: जब पीआईओ जानकारी नहीं देता, तब आवेदक फर्स्ट अपील करता है। शिकायत के अनुसार, यहां के FAA धारा 19(6) का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। नियम कहता है कि अपील का निपटारा 30 से 45 दिनों में होना चाहिए, लेकिन यहां अपीलों पर कोई सुनवाई नहीं होती।

राज्य सूचना आयोग पर बढ़ता बोझ: शिकायतकर्ता ने एक चौंकाने वाला तथ्य रखा है कि लगभग 75% मामलों में आवेदकों को द्वितीय अपील के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है। यदि पीआईओ और एफएए अपना काम ईमानदारी से करें, तो केवल कानूनी विवाद वाले मामले ही आयोग तक पहुंचेंगे। अधिकारियों की “एथिकल एप्रोच” न होने के कारण आयोग में केसों का ढेर लग रहा है।

आवेदकों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न: अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये के कारण आम जनता को न्याय के लिए भटकना पड़ता है। जो जानकारी स्थानीय स्तर पर मिलनी चाहिए, उसके लिए महीनों का समय और पैसा बर्बाद किया जा रहा है।

शिकायत में की गई मुख्य मांगें: रोहित सभरवाल ने आयोग से अपील की है कि आरटीआई एक्ट का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि वो समय पर सूचनाएं उपलब्ध कर सके।

About Punjab News Live -PNL

Check Also

अमृतसर पुलिस ने हथियार तस्करी मॉड्यूल किया बेनकाब:3 आरोपी गिरफ्तार, 6 पिस्तौल बरामद; सीमा पार से खेप मंगवाता था गिरोह

अमृतसर  , (PNL) : अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय अवैध हथियार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!