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ED ने बिल्डर अजय सहगल को किया अरेस्ट:15 किसानों की जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाकर लिया CLU; कई प्रोजेक्ट खड़े किए

चंडीगढ़  , (PNL) :  प्रवर्तन निदेशालय (ED) जालंधर ने मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन का चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) हासिल करने के मामले में इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी के सचिव अजय सहगल को गिरफ्तार किया है।

ED की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि 15 किसानों की 30.5 एकड़ जमीन से जुड़े फर्जी कंसेंट लेटर तैयार किए गए। इन दस्तावेजों पर जमीन मालिकों के नकली हस्ताक्षर और फर्जी अंगूठे लगाकर CLU हासिल किया गया। इसी आधार पर ‘संटेक सिटी’ नाम का बड़ा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित किया गया।

यह जांच पंजाब पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। किसानों ने शिकायत दी थी कि उनकी मंजूरी के बिना ही उनकी जमीन के दस्तावेज इस्तेमाल कर लिए गए।

संटेक सिटी के अलावा कई और प्रोजेक्ट भी खड़े किए

ED जांच में सामने आया कि अजय सहगल ने फर्जी CLU के आधार पर सिर्फ ‘सनटेक सिटी’ ही नहीं, बल्कि ‘ला कैनेला’ नाम का मल्टी-स्टोरी रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और ‘डिस्ट्रिक्ट-7’ कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी विकसित किया।

जांच एजेंसी के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स में यूनिट्स की बिक्री RERA से मंजूरी और रजिस्ट्रेशन मिलने से पहले ही शुरू कर दी गई थी। इससे खरीदारों को भी नियमों के खिलाफ प्रोजेक्ट्स में निवेश कराया गया।

EWS प्लॉट अब तक GMADA को नहीं सौंपे

ED ने अपनी जांच में पाया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए निर्धारित प्लॉट अब तक GMADA के एस्टेट ऑफिसर को ट्रांसफर नहीं किए गए। यह भी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।

एजेंसी का कहना है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हुई चर्चा के बावजूद सिर्फ 30 एकड़ जमीन का आंशिक CLU ही रद्द किया गया। आरोप है कि डेवलपर को बचाने के लिए पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट की धारा 90 के बजाय धारा 85 के तहत कार्रवाई की गई, ताकि ‘संटेक सिटी’ अपना बाकी स्टॉक बेच सके।

ED रेड के दौरान बालकनी से फेंके गए 21 लाख

इस मामले में ED ने 7 मई को इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटी और ABS Township Private Limited से जुड़े 8 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

छापेमारी के दौरान एक परिसर से 21 लाख रुपए नकद बालकनी से नीचे सड़क पर फेंक दिए गए थे। पैसे सड़क पर बिखर गए, लेकिन बाद में ED अधिकारियों ने पूरी रकम बरामद कर ली।

GMADA और टाउन प्लानिंग विभाग पर भी सवाल

ED की जांच अब GMADA और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग तक पहुंच गई है। एजेंसी का दावा है कि कई अधिकारियों ने अवैध लाभ लेकर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी और रियल एस्टेट डेवलपर्स को फायदा पहुंचाया।

जांच में यह भी सामने आया है कि पंजाब में कई डेवलपर्स को नियमों के खिलाफ मंजूरियां देकर किसानों और जमीन मालिकों के हितों को नुकसान पहुंचाया गया।

सूत्रों के मुताबिक ED जल्द ही इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां कर सकती है। एजेंसी GMADA और अन्य विभागों के उन अधिकारियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन पर रिश्वत लेकर इस पूरे फर्जीवाड़े को समर्थन देने का आरोप है।

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