मोहाली में कनाडा भेजने के नाम पर ₹1.87 लाख ठगे:फर्जी ऑफर लेटर दिया, बचने के लिए 12 फोन नंबर बदले; केरल की रहने वाली
Punjab News Live -PNL
July 8, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, पंजाब
मोहाली , (PNL) : मोहाली में केरल की एक युवती से कनाडा भेजने के नाम पर 1.87 लाख रुपए की ठगी की गई है। आरोप है कि ठगों ने वर्क परमिट दिलाने का झांसा देकर उससे पैसे लिए और बाद में फर्जी ऑफर लेटर थमा दिया। आरोपी पहले लगातार टालमटोल करते रहे, जिसके बाद उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जांच में सामने आया कि ठगी करने वाले आरोपियों ने दो साल के दौरान 13 मोबाइल नंबर बदल लिए थे। पीड़िता ने जब इंटरनेट और फेसबुक पर एजेंसी के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी की गई है। शिकायत के आधार पर अर्जुन सिंह और गुरदित्ता सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
अब पूरे मामले को 4 प्वाइंटों में जानिए:-
-
कनाडा के लिए संपर्क किया: केरल के पालक्काड निवासी प्रतीक्षा अरुणकुमार ने कनाडा में नौकरी पाने के लिए वर्ष 2024 में मोहाली के फेज-11 स्थित एक निजी कंपनी से संपर्क किया था। एजेंसी ने उसे कनाडा का वर्क परमिट दिलाने का भरोसा दिया और इसके लिए ऑफर लेटर, एलएमआईए (LMIA) समेत अन्य दस्तावेज उपलब्ध करवाए। वीजा प्रक्रिया के नाम पर करीब एक साल तक उसे भरोसे में रखा गया। एजेंसी ने उसे बताया कि वर्क वीजा की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन वास्तव में उसका बायोमेट्रिक टेंपरेरी रेजिडेंट (टूरिस्ट/विजिटर) वीजा के लिए करवाया गया।
-
वीजा रद्द होने पर पता चला: आरोपियों ने एलएमआईए वर्क परमिट की सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर बैंक ट्रांसफर के जरिए 1.50 लाख रुपए जमा करवाए। एग्रीमेंट में दावा किया गया था कि कनाडा पहुंचने के छह महीने के भीतर यह राशि वापस कर दी जाएगी। इस तरह पीड़िता से कुल 1 लाख 87 हजार 500 रुपए लिए गए। वीजा आवेदन खारिज होने के बाद प्रतीक्षा को ठगी का पता चला।
-
वर्क वीजा की जगह विजिटर वीजा की प्रक्रिया में भेजा: जांच में सामने आया कि उसे वर्क वीजा की जगह विजिटर वीजा की प्रक्रिया में भेजा गया था। वहीं, एजेंसी की ओर से दिया गया ऑफर लेटर भी कथित तौर पर फर्जी पाया गया। पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन आरोपी टालमटोल करते रहे। बाद में उन्होंने फोन उठाने भी बंद कर दिए। प्रतीक्षा ने इंटरनेट और फेसबुक पर एजेंसी के बारे में जानकारी जुटाई।
-
हर कुछ महीनों में मोबाइल नंबर बदलते रहे: उसे पता चला कि एजेंसी पर पहले भी कई लोगों से ठगी के आरोप लग चुके हैं। उसने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे हर कुछ महीनों में मोबाइल नंबर बदलते रहे। पिछले दो वर्षों में करीब 13 अलग-अलग मोबाइल नंबर इस्तेमाल किए गए, जो बाद में बंद मिले।
एनआरआई विंग में दी शिकायत
पीड़िता ने इस्तेमाल किए गए फेसबुक पेज, व्हाट्सएप चैट, ईमेल, इंटरनेट विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्ड्स को डिजिटल साक्ष्य के रूप में पुलिस को सौंप दिया। जब मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने एडीजीपी एनआरआई विंग से संपर्क किया।
इसके बाद अधिकारियों के आदेश पर मोहाली के एनआरआई थाने में अर्जुन सिंह और गुरदित्ता सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) और इमिग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 24 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

