कार ओवरटेक को लेकर हुए विवाद में युवक का मर्डर:मोहाली कोर्ट ने 3 को उम्रकैद की सजा सुनाई; चौथा सबूतों के अभाव में बरी
Punjab News Live -PNL
July 29, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, पंजाब
मोहाली , (PNL) : मोहाली के जीरकपुर में छह साल पहले कार ओवरटेक करने को लेकर हुए विवाद में कुलदीप सिंह की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मोहाली जिला अदालत ने गुरविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह और परविंदर सिंह (सभी निवासी गांव सनौली, जीरकपुर) को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं, चौथे आरोपी मनिंदर सिंह उर्फ मिंटू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अदालत का विस्तृत फैसला (डिटेल ऑर्डर) भी जारी हो चुका है। आइए जानते हैं पूरे मामले की कहानी।
अब 5 प्वाइंट में जानिए कैसे हुआ विवाद:
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ओवरटेक और आंखें मिलने पर शुरू हुआ विवाद: 30 जून 2019 को पवन सरोहा अपने दोस्तों कुलदीप सिंह और निपुण जैन के साथ पंचकूला से जीरकपुर जा रहे थे। इसी दौरान सनौली लिंक रोड पर पीछे से आ रही फोर्ड फिगो कार में सवार लोगों से ओवरटेक करने और आंखें मिलने की बात को लेकर कहासुनी हो गई।
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कार रुकवाकर कुलदीप पर किया हमला: आरोपियों ने अपनी कार आगे लगाकर स्कोडा रुकवा ली। इसके बाद कुलदीप सिंह को निशाना बनाते हुए उस पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। बचाने आए पवन और निपुण के साथ भी मारपीट की गई।
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अस्पताल पहुंचने से पहले चली गई जान: हमले के बाद कुलदीप सिंह बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
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मेडिकल रिपोर्ट ने खोली मौत की वजह: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुलदीप सिंह की कई पसलियां टूटी हुई पाई गईं। लीवर और तिल्ली में गंभीर चोटें थीं, जबकि पेट के अंदर अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत होने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान आरोपियों के घरों से बरामद जूतों को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया।
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मृतक की पहले से बीमारी होने का हवाला दिया: आरोपियों ने एफआईआर में देरी, सीसीटीवी फुटेज नहीं होने और मृतक की पहले से बीमारी होने का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि चश्मदीद गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ कि कुलदीप सिंह की छह पसलियां टूट गई थीं। लीवर व तिल्ली फटने से पेट के अंदर अत्यधिक खून बह गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
शुरुआत में FIR में था नाम
30 जून 2019 को दर्ज एफआईआर में मनिंदर सिंह उर्फ मिंटू को भी गुरविंदर सिंह, सुखविंदर सिंह और परविंदर सिंह के साथ आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मनिंदर सिंह भी फोर्ड फिगो कार में सवार था। जांच के दौरान पुलिस ने पूरक चालान पेश किया, जिसमें सामने आया कि मनिंदर सिंह के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।
साइबर सेल की रिपोर्ट और मोबाइल टॉवर लोकेशन से पता चला कि घटना के समय मनिंदर सिंह का मोबाइल घटनास्थल के आसपास मौजूद नहीं था। तकनीकी साक्ष्यों के अनुसार, वह किसी अन्य स्थान पर था। अदालत में गवाही के दौरान किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं किया कि मनिंदर मौके पर था या उसने मारपीट में भाग लिया था।
तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में उसकी भूमिका साबित नहीं होने पर अदालत ने मनिंदर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जबकि बाकी तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर उन्हें दोषी ठहराया गया।