परगट सिंह बोले- CM पद का मैं भी दावेदार:पंजाब कांग्रेस में इतने चेहरे कि हर कोई मुख्यमंत्री बन सकता; राहुल के नेतृत्व में लड़ेंगे चुनाव
Punjab News Live -PNL
October 10, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, पंजाब
चंडीगढ़ , (PNL) : पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान परगट सिंह ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। एक चैनल से बातचीत में उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक सुखपाल सिंह खैरा का नाम भी लिया।
परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस में इतने चेहरे हैं कि हर कोई मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, उन्होंने किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया और कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
परगट सिंह कल यानी रविवार (11 अक्टूबर) को पंजाब कांग्रेस प्रधान के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे। चंडीगढ़ में स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में उनके पदभार ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस कार्यक्रम में पार्टी के करीब 10 हजार कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है।
परगट सिंह की तीन बड़ी बातें…
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परगट सिंह ने कहा कि चन्नी, राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुखपाल सिंह खैरा जैसे वरिष्ठ नेताओं के पास काफी अनुभव है। वह उनके अनुभव का लाभ उठाकर पार्टी को मजबूत करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।
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पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी मनमुटाव की चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। हर नेता की भूमिका तय की जाएगी और सभी को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति के बजाय सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम किया जाएगा। हॉकी के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह ने कहा कि वह राजनीति में स्ट्राइकर की भूमिका निभाएंगे, लेकिन फुल बैक के तौर पर भी खेलने के लिए तैयार हैं।
सीएम पद पर परगट सिंह की दावेदारी के 4 कारण
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प्रदेश प्रधान का पद: 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रधान नियुक्त किया है। राजनीतिक परंपराओं के अनुसार, चुनाव से ठीक पहले प्रदेश प्रधान बनने वाला नेता स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हो जाता है।
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गुटबाजी खत्म करने के लिए ‘स्वीकार्य चेहरा’: पंजाब कांग्रेस लंबे समय से चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग के गुटों के बीच खींचतान से जूझ रही थी। परगट सिंह की छवि एक साफ-सुथरे और विवादों से दूर रहने वाले नेता की है, जिन्हें सभी धड़े स्वीकार करते हैं। वह चन्नी और नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट दोनों के करीबी माने जाते हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हुई है।
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संतुलित सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण: परगट सिंह जट्ट सिख समुदाय से आते हैं और दोआबा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें कमान सौंपकर कांग्रेस ने बिना किसी बड़े सामाजिक बदलाव के समीकरणों को संतुलित किया है, जो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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तीन बार के विधायक रह चुके: वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपिक खिलाड़ी रह चुके हैं। इसके अलावा, वह पंजाब के खेल और शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं और तीन बार के विधायक हैं। उनकी बेदाग और मुखर राजनीतिक शैली के कारण उन्हें एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है।
2 अक्टूबर को बने प्रदेश अध्यक्ष
जालंधर कैंट से विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह को 2 अक्टूबर 2026 को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह ली।
पार्टी में अंदरूनी गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाओं के बीच कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह पर भरोसा जताया। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में विजय इंदर सिंगला का नाम भी चर्चा में था, लेकिन हाईकमान ने परगट सिंह को संगठन की कमान सौंपी।
2027 से पहले गुटबाजी खत्म करना चुनौती
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और सभी गुटों को एकजुट करने की चुनौती है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं।
ऐसे में परगट सिंह के सामने सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। हॉकी के मैदान में भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके परगट सिंह के लिए राजनीतिक मैदान में भी टीम के सभी खिलाड़ियों को साथ लेकर चलना अहम होगा। विरोधियों का कहना है कि उनके लिए यह राह आसान नहीं होगी।