लुधियाना , (PNL) : पंजाब में सरकारी मुलाजिमों ने हड़ताल खत्म कर दी है। सरकार ने शोकॉज नोटिस वापस ले लिया है। अब कर्मचारियों की जल्द ही CM भगवंत मान से मीटिंग होगी। बुधवार (9 सितंबर) को कर्मचारियों की चंडीगढ़ स्थित पंजाब सचिवालय में चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा से मीटिंग हुई।
मीटिंग के बाद चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि ने कहा कि कर्मचारियों ने उनसे मुलाकात की है। सभी हड़ताल नहीं करने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल वापस लेने की स्थिति में कर्मचारियों को जारी किए गए शोकॉज नोटिस भी वापस ले लिए जाएंगे।दरअसल, कर्मचारियों ने मांगें न माने जाने पर 11 सितंबर तक सामूहिक छुट्टी लेकर हड़ताल जारी रखने का फैसला किया था। पहले सिर्फ 8 सितंबर को हड़ताल का ऐलान था।
यूनियन के मुताबिक, 27 अगस्त की हड़ताल के बाद करीब 2,500 कर्मचारियों की गैरहाजिरी पर कार्रवाई के लिए सरकार ने पत्र जारी किया था। कर्मचारी इसी पत्र को वापस लेने की मांग कर रहे थे।वहीं, मंगलवार को सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ लागू करने और गैरहाजिरी पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
सरकार ने अपने आदेश में क्या कहा था…
हाजिरी लगाकर गायब होने पर सख्ती: पंजाब सरकार के कार्मिक विभाग ने लेटर जारी करते हुए कहा था कि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई कर्मचारी सुबह दफ्तर पहुंचकर अपनी अटेंडेंस तो लगा देते हैं, लेकिन इसके बाद बिना किसी पूर्व अनुमति के गायब हो जाते हैं। काम के दौरान कर्मचारियों की इस गैरमौजूदगी से आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
‘नो वर्क, नो पे’ का नियम लागू: दफ्तर से गैरहाजिर रहने वाले या काम ठप करने वाले कर्मचारियों को ‘अनधिकृत रूप से अनुपस्थित माना जाएगा। स्थापित सिद्धांतों के तहत जितने दिन या घंटे कर्मचारी काम नहीं करेंगे, उन्हें उस अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा।
कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई: केवल वेतन काटना ही काफी नहीं होगा, बल्कि अनधिकृत रूप से ड्यूटी से नदारद रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ पंजाब सिविल सेवाएं (सजा और अपील) नियमों के तहत विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अधिकारियों को कड़े निर्देश: सरकार ने पंजाब के सभी विशेष मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, वित्तीय आयुक्तों, प्रमुख सचिवों और प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए कि अपने-अपने विभागों में इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।