जालंधर , (PNL) : नूरमहल शहर के नकोदर-जालंधर बाईपास पर पुलिया निर्माण कार्य ठप होने से जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर काउंसिल की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी हुई है। 8-9 जुलाई को इस मार्ग पर स्थित पुरानी पुलिया को तोड़कर नया बनाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा।मानसून और बारिश का मौसम शुरू होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। तोड़ी गई पुलिया का गड्ढा बारिश के पानी से भर गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बीच निर्माण कार्य दोबारा कब शुरू होगा, यह स्पष्ट नहीं है। प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
पुलिया पर चेतावनी या सांकेतिक बोर्ड नहीं लगाए गए।
नकोदर, जालंधर और फगवाड़ा से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग
यह बाईपास नूरमहल को नकोदर, जालंधर और फगवाड़ा से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। इसी रास्ते पर सब-तहसील कार्यालय, एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, मुख्य बाजार और सिविल अस्पताल स्थित हैं, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
यह रास्ता किसी भूल-भुलैया जैसा बन गया
मुख्य मार्ग बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए यह रास्ता किसी भूल-भुलैया जैसा बन गया है, जिससे उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चेतावनी या सांकेतिक बोर्ड नहीं लगाए गए
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि वैकल्पिक मार्गों और मुख्य रास्तों पर कोई चेतावनी या सांकेतिक बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इसके कारण ट्रैफिक शहर के अंदरूनी हिस्सों और संकरी गलियों में भटक रहा है, जिससे जाम की स्थिति पैदा हो रही है।
पुलिया से गुजरते हुए लोग।
जगह संकरी होने के चलते क्रेन फंसी रही
हाल ही में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत फगवाड़ा से आई एक विशालकाय क्रेन भी रास्ता बंद होने और सांकेतिक बोर्ड न होने के कारण बाईपास पर पहुंच गई। जगह संकरी होने के चलते क्रेन दिनभर वहीं फंसी रही और ट्रैफिक कम होने के बाद ही उसे वापस निकाला जा सका।
दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित
मुख्य मार्ग बंद होने से वाहनों का दबाव रिहायशी गलियों में बढ़ गया है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। वहीं, दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि मुख्य रास्तों पर तुरंत चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, जल निकासी की व्यवस्था की जाए और पुलिया निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।