पठानकोट , (PNL) : पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI पंजाब में गड़बड़ी फैलाने के लिए डबल टारगेट कर रही है। एक तरफ युवाओं को पैसे का लालच देकर जासूसी करा रही है तो दूसरी तरफ उन्हें ड्रग्स तस्करी के दलदल में धकेल रही है। पठानकोट में पकड़े गए जासूसी के आरोपियों से PAK एजेंसी का ये मॉड्यूल सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों और पंजाब पुलिस को शक है कि यह सिर्फ कुछ युवकों की जासूसी का मामला नहीं बल्कि एक पूरा स्पाई नेटवर्क है। जिसमें ISI ने कैश और ड्रग्स के बदले कई लोगों को लालच देकर अपने साथ जोड़ रखा है। पुलिस को ये भी पता चला कि इन आरोपियों के हैंडलर पाकिस्तान में बैठे थे लेकिन दुबई से निर्देश मिलते थे। वहीं पूरी बातचीत सीक्रेट एप के जरिए होती थी ताकि भारतीय एजेंसियों को पता न चल सके।
जासूसी के आरोप में पकड़े गए पांचों आरोपी।
पूरे मामले का खुलासा कैसे हुआ सीक्रेट इनपुट पर पुलिस ने सबसे पहले पठानकोट के गांव चक्क धारीवाल के बलजीत सिंह उर्फ बीतू को गिरफ्तार किया। उस पर अरोप था कि उसने NH-44 पर CCTV कैमरा लगाकर पंजाब और जेएंडके के बीच सेना की मूवमेंट की लाइव फीड पाकिस्तान भेजी। वही मास्टरमाइंड था। जो पूरे जासूसी नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। उससे पूछताछ के बाद फिरोजपुर कलां के रहने वाले अंकित शर्मा को 22 मई को अरेस्ट किया। बलजीत ने इसी की दुकान पर कैमरा लगाया था।
2 दिन बाद बलजीत के बड़े भाई हरदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसने पुलिस रेड के दौरान बलजीत का मोबाइल छुपाया। डिजिटल सबूत नष्ट किए। 25 मई को पुलिस ने बलजिंदर सिंह उर्फ विक्की और तरनप्रीत सिंह उर्फ तन्नू को गिरफ्तार किया। ये गुरदासपुर के थाना दोरांगला में आने वाले गांव संदलपुर के हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक ये दोनों पहले से ISI के सीधे टच में थे और नेटवर्क को हैंडलर से जोड़ रहे थे।
5 आरोपियों से 3 बड़े खुलासे हुए:-
1. सिर्फ पैसा नहीं, ड्रग्स का भी लालच: पठानकोट के SSP दलजिंदर सिंह ढिल्लो ने कहा- जासूसी के आरोपी महज पैसों के लिए काम नहीं कर रहे थे। ISI हैंडलर्स खुफिया इन्फॉर्मेशन लेने के बदले उन्हें ड्रग्स मुहैया करवाते थे। जिन्हें बेचकर ये बड़ी मात्रा में पैसे कमा रहे थे। ये ड्रग्स ड्रोन के जरिए सीमा पार से भेजी थी। जिसे ये आरोपी गुरदासपुर सहित अन्य पड़ोसी जिलों में बेचते थे।
2. सीक्रेट एप के जरिए बातचीत: SSP ढिल्लो के मुताबिक आरोपी पाकिस्तान या दुबई में बैठे आकाओं के साथ बात करने के लिए नॉर्मल कॉल या वॉट्सऐप पर कॉन्टैक्ट नहीं करते थे। ये एक स्पेसिफिक खुफिया एप के जरिए एक-दूसरे के टच में रहते थे। पूरा नेटवर्क इसी एप से जुड़ा हुआ था। वे ऐसा इसलिए करते थे, ताकि यहां की जांच एजेंसियों को उनके बारे में भनक न लग सके।
2 आरोपी पहले से ISI के टच में, करोड़ों कमा चुके: पुलिस सोर्सेज के मुताबिक आरोपी बलजिंदर व तरनप्रीत 3 साल से नशा तस्करी करते हैं। उनके ISI से रिश्ते बने और फिर वह बलजीत को तस्करी में ले आए। उसका भी ISI से कॉन्टैक्ट कराया। इसके बाद उससे जासूसी में भी साथ मिला लिया। ये दोनों नशे में करोड़ों रुपए कमा चुके हैं और नशे पर काफी पैसे खर्च भी कर चुके हैं।
मामले संबंधी जानकारी देते एसएसपी दलजिंदर सिंह ढिल्लों।
सिर्फ CCTV नहीं, पूरा स्पाई मॉड्यूल होने का शक पुलिस सोर्सेज के मुताबिक जांच एजेंसियां अब इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि यह सिर्फ कैमरा लगाकर सेना की मूवमेंट रिकॉर्ड करने का मामला नहीं, बल्कि पूरा हाईटेक स्पाई मॉड्यूल हो सकता है। इसी वजह से दुबई लिंक, पाकिस्तान से ड्रग्स कनेक्शन और कई जिलों तक फैले नेटवर्क ने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
सिर्फ 40 हजार कैश की बात गले नहीं उतर रही आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि बलजीत सिंह को नेशनल हाईवे पर जासूसी के लिए कैमरा लगाने के बदले 40 हजार रुपए मिले थे। जांच एजेंसियों मान रही हैं कि जिस हिसाब से मास्टरमाइंड बलजीत को पाकिस्तान नहीं बल्कि दुबई से निर्देश मिल रहे थे, ऐसे में यह जांच जरूरी है कि दुबई सिर्फ लिंक था या फिर ISI ने इस पूरे नेटवर्क का कंट्रोल पॉइंट ही वहां बना लिया है।
आरोपियों से अब क्या उगलवाने में जुटीं एजेंसियां?
सेना की कितनी जानकारी पाकिस्तान पहुंची?: जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं कि सिर्फ सेना के काफिलों की मूवमेंट भेजी गई या कोई और संवेदनशील जानकारी भी लीक हुई।
कितना पैसा और कितना ‘इनाम’ मिला?: जांच इस बात पर भी है कि पाकिस्तान से अब तक कितनी फंडिंग आई और ड्रग्स के जरिए कितना फायदा पहुंचाया गया।
पंजाब-देश के अंदर कौन-कौन जुड़ा?: सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ 5–6 लोगों का नेटवर्क था या पंजाब के दूसरे जिलों में भी इसके तार फैले हैं।
दुबई कनेक्शन कितना बड़ा?: इस मामले में दुबई कनेक्शन ने जांच एजेंसियों को चौंकाया है। पाकिस्तान से टच में होने के बावजूद निर्देश दुबई से मिल रहे थे। पुलिस को शक है कि ये पूरा ऑपरेशन वहीं से हैंडल हो रहा था।
कौन है असली ISI हैंडलर?: जांच का बड़ा फोकस उन पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुंचना है जो पूरे नेटवर्क को चला रहे थे। इसके अलावा जो दुबई में बैठकर निर्देश दे रहा था, खुफिया एजेंसियां उसका भी पता लगा रही हैं।
ड्रग्स और जासूसी का कनेक्शन कितना पुराना?: जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि जासूसी के बदले ड्रग्स इसी मामले में है या फिर यह नेटवर्क पहले से चल रहा है। इसी वजह से ड्रोन के जरिए नशा तस्करी की रोजाना कोशिश होती रहती है।