पंजाब के मुलाजिमों को 8% DA जारी करेगी सरकार:CM के साथ मीटिंग के बाद डेडलॉक टूटा; यूनियन बोली- कोर्ट में केस चलता रहेगा
Punjab News Live -PNL
September 18, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, पंजाब
चंडीगढ़ , (PNL) : पंजाब में मुलाजिमों और पेंशनर्स के पेंडिंग पड़े DA समेत बकाया मांगों को लेकर आज बड़ा फैसला हुआ। इसको लेकर CM भगवंत मान की चंडीगढ़ में मुलाजिम नेताओं की मीटिंग हुई। मीटिंग में सीएम ने कहा कि 8% DA सरकार जारी करेगी।
बैठक के बाद मंत्री अमन अरोडा के साथ मुलाजिमों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्री ने कहा कि CM के साथ मीटिंग के बाद मुलाजिमों का डेडलॉक टूट गया है। मुलाजिम हमारे परिवार का हिस्सा हैं।
अमन अरोड़ा ने आगे कहा कि हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का हक है और सरकार को उसको सुनना चाहिए। डीए को लेकर सरकार ने 8 प्रतिशत देने की बात कही है। इसी वेतन के साथ मिलेगा। आठ प्रतिशत देने से करीब 248 करोड़ रुपए सरकार पर अतिरिक्त बोझ होगा।
इससे पहले जालंधर में CM भगवंत मान ने मुलाजिम यूनियन से मीटिंग से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि पहले हड़ताल खत्म करो, उसके बाद ही बात होगी। जब मुलाजिम नेता नहीं माने तो सीएम वहां से बिना बातचीत किए चले गए।
मीटिंग में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, पार्टी प्रधान व कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर भी मौजूद रहे। इसके अलावा सांझा फ्रंट ऑफ पेंशनर्स, संयुक्त मुलाजिम मंच, पंजाब सचिवालय एसोसिएशन, पंजाब सिविल सचिवालय ऑफिसर्स एसोसिएशन (Retd.) समेत अलग-अलग संगठनों के 12 नेताओं को बुलाया गया था।
1. मूल विवाद क्या है?
पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स DA/DR की लंबित किस्तों और उनके एरियर की मांग कर रहे हैं। विवाद का एक महत्वपूर्ण आधार 6वें पंजाब पे कमीशन की सिफारिश है, जिसमें DA को केंद्र सरकार के पैटर्न पर जारी रखने की बात स्वीकार की गई थी। पंजाब सरकार ने 2021 के बाद कई DA आदेश भी जारी किए।
2. हाईकोर्ट ने क्या कहा?
3 अगस्त 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की सभी अपडेटेड लंबित DA/DR किस्तें केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार जारी की जाएं।
3. किस दर पर DA देने का निर्देश है?
कोर्ट ने इसे पंजाब में कार्यरत IAS/IPS/IFS अधिकारियों को मिलने वाली केंद्रीय दरों के साथ जोड़ा। यानी आदेश सिर्फ मौजूदा पंजाब DA प्रतिशत को बढ़ाने तक सीमित नहीं था, बल्कि केंद्रीय पैटर्न के अनुरूप लंबित किस्तों की बात करता है।
4. कितने समय में भुगतान करना था?
3 अगस्त के आदेश में हाईकोर्ट ने 15 दिन के भीतर लंबित DA/DR किस्तें जारी करने को कहा था। कोर्ट ने निर्देश दिया कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 6% सालाना साधारण ब्याज लगेगा, जो निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद से वास्तविक भुगतान तक होगा।
5. सरकार का क्या कहना है?
सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि को इतनी कम अवधि में जारी करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि 2021 के पंजाब पे रूल्स में DA की कोई निश्चित केंद्रीय दर/फॉर्मूला अनिवार्य नहीं किया गया है और DA की दर तय करने का अधिकार राज्य के पास है।
6. हाईकोर्ट का इस पर क्या निष्कर्ष था?
हाईकोर्ट ने 3 अगस्त के फैसले में कहा कि 6वें पंजाब पे कमीशन ने केंद्रीय पैटर्न पर DA जारी रखने की सिफारिश की थी और राज्य सरकार ने उस सिफारिश को स्वीकार किया था। कोर्ट ने बाद के DA आदेशों का भी उल्लेख किया, जिनमें 2021 के बाद 28%, 34%, 38% और 42% तक की दरों के आदेश शामिल थे।
7. पंजाब सरकार की सुप्रीम कोर्ट में याचिका कब दायर की, उसकी क्या स्थिति है?
पंजाब सरकार ने 1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल की थी। इसमें 3 अगस्त के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई और उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने पंजाब की SLP में 9 तकनीकी आपत्तियां बताई थीं। 11 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य को इन आपत्तियों को दूर करके सुप्रीम कोर्ट में अपनी चुनौती आगे बढ़ाने के लिए 10 दिन का समय दिया। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 के लिए रखी।
8. क्या सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट में अभी इस मामले में सुनवाई शुरू नहीं हुई है। 11 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि वह 10 दिन में सुप्रीम कोर्ट में अपनी सुनवाई शुरू करवाए, वरना हाईकोर्ट फिर से पिछले आदेश का पालन न करने को लेकर सुनवाई शुरू करेगा। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि उसके आदेश को लागू करने का काम रुकना नहीं चाहिए।
9. क्या सरकार ने पहले से कुछ DA/एरियर भुगतान किया है?
सरकार ने अदालत के सामने कहा है कि लिक्विडेशन के तहत करीब ₹6,000 करोड़ पहले ही दिए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि अलग-अलग आयु वर्ग के पेंशनर्स और अन्य बकायों का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
10. कर्मचारी संगठन अभी क्या मांग रहे हैं?
कर्मचारी संगठन लंबित DA किस्तों और एरियर के भुगतान की मांग जारी रखे हुए हैं। अगस्त-सितंबर में इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन भी हुआ। 8 सितंबर को सरकार ने आंदोलन के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों के लिए ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश जारी किया। हालांकि, मुलाजिम पीछे नहीं हटे। इसके बाद उनकी चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा से बैठक हुई, जिसके बाद सीएम से बैठक का रास्ता साफ हुआ।
11. कर्मचारियों का दावा बनाम सरकार का दावा
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि राज्य के टैक्स राजस्व में काफी वृद्धि हुई है और करीब ₹14,200 करोड़ के बकाये का भुगतान किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि अधिक राजस्व का मतलब यह नहीं कि उतनी रकम तुरंत उपलब्ध है, क्योंकि वेतन, पेंशन, ब्याज और कर्ज की अदायगी जैसी दूसरी देनदारियां भी हैं। इसके अलावा, सरकार का कहना है कि वह मुलाजिमों को पहले ही ज्यादा सैलरी दे रही है।
बैठक में इन मुद्दों पर होगी अहम चर्चा कर्मचारी संगठनों की सरकार से 10 अहम मांगें हैं, जिनमें पे-कमिशन की विसंगतियां, पुरानी पेंशन योजना, महंगाई भत्ता (DA) और बकाया किस्तें, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने जैसी अहम मांगें शामिल हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांगों को पहले अलग-अलग ज्ञापनों के जरिए पहुंचा चुके हैं।