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पंजाब के बेअदबी कानून को हाईकोर्ट में चुनौती:याचिका में दी गईं 2 दलीलें; अगले 2-3 दिन में सुनवाई की संभावना

चंडीगढ़  , (PNL) : पंजाब में बेअदबी कानून को लेकर पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दो बिंदुओं को लेकर चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि इस कानून में सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं, जबकि नियमों के अनुसार ऐसे कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है।जालंधर निवासी याची सिमरनजीत सिंह ने बताया कि वह सिख परिवार से संबंधित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में स्वयं इस मामले की पैरवी करेंगे।

सिमरजीत सिंह ने अदालत में दायर याचिका में दो प्वाइंटों को उठाया है –

1. सिमरनजीत सिंह ने कहा कि यह देश धर्मनिरपेक्ष है और संविधान में यह स्पष्ट रूप से लिखा है, लेकिन यह कानून केवल एक धर्म के लिए नहीं लाया जा सकता। यह एक्ट सेकुलर नहीं है और क्या बाकी धर्मों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती है।

2. दूसरा, उन्होंने संविधान की धारा 254 का उल्लेख किया। इसके अनुसार, यदि किसी राज्य का कानून केंद्र के कानून के विपरीत है, तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी लेना आवश्यक होता है। यानी यदि बीएनएस के खिलाफ कोई सख्त सजा वाला कानून लाया जाता है, तो उसकी मंजूरी राष्ट्रपति से लेना जरूरी है।

इस मामले में राज्य सरकार ने अपनी पब्लिसिटी के लिए राज्यपाल से मंजूरी लेकर 20 तारीख को गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इससे उन सभी श्रद्धालुओं के लिए चिंता पैदा हो गई है, जिनके घर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब सुशोभित है।

सेक्शन 4 में ‘कस्टोडियन’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसके अनुसार हर वह व्यक्ति कस्टोडियन माना जाएगा जिसके पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप है। सेक्शन 3बी में यह प्रावधान है कि बेअदबी की स्थिति में कस्टोडियन को तुरंत पुलिस को सूचित करना होगा।

इसके अलावा, सेक्शन 5 के तहत यदि बेअदबी साबित होती है तो उम्रकैद तक की सख्त सजा का प्रावधान है। उनका कहना है कि जब इतनी कठोर सजा का प्रावधान है, तो इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी लेना आवश्यक था।

पंजाब में बेअदबी कानून कैसे बना

1. कैबिनेट मंजूरी

राज्य में बेअदबी की घटना को रोकने के लिए पंजाब सरकार के मंत्रिमंडल ने 11 अप्रैल 2026 को “जागत जोति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026” को मंजूरी दी।

2. विधानसभा में पारित पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में 13 अप्रैल 2026 को यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ। बिल को मंजूरी के लिए पंजाब सरकार को भेजा गया।

3. राज्यपाल की मंजूरी

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 17 अप्रैल 2026 को इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए।

4. अधिसूचना पंजाब सरकार ने 20 अप्रैल 2026 को इसे आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया, जिसके बाद यह कानून पूरे राज्य में लागू हो गया। पंजाब पुलिस ने बेअदबी मामलों की जांच के लिए तय किए मानक

जांच 60 से 90 दिनों के भीतर पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल करनी होगी।

जांच DSP रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा।

घटनास्थल की हाई-रिज़ॉल्यूशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।

CCTV, सोशल मीडिया, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल फुटप्रिंट और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन की भी जांच होगी।

गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप को केवल अधिकृत धार्मिक पदाधिकारियों की मौजूदगी में ही संभाला जाएगा।

आरोपी का मानसिक मूल्यांकन (फॉरेंसिक साइकियाट्रिक एग्जामिनेशन) जरूरी होगा, यदि वह मानसिक रूप से अस्थिर पाया जाता है। उम्र कैद तक की सजा इस कानून के तहत दोषियों को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 5 लाख से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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