ब्रेकिंग : सड़क हादसे में पंजाब कांग्रेस के नेता खुशबाज जटाना की मौत, दिल्ली से लौटते समय हुआ एक्सीडेंट
Punjab News Live -PNL
April 2, 2026
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बठिंडा, (PNL) : पंजाब कांग्रेस के युवा नेता खुशबाज सिंह जटाणा का हरियाणा के करनाल के पास एक सड़क हादसे में दुखद निधन हो गया। उनकी अचानक मौत से न केवल बठिंडा जिले बल्कि पूरे पंजाब में शोक की लहर दौड़ गई है। जटाणा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर तीसरी बार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे।
खुशबाज सिंह जटाणा लगातार दो बार जिला कांग्रेस (देहाती) बठिंडा के अध्यक्ष रह चुके थे और पार्टी संगठन को मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। वे मूल रूप से फाजिल्का जिले के गांव पन्नीवाला के रहने वाले थे, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बठिंडा जिले के तलवंडी साबो विधानसभा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
जटाणा ने पटियाला स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की थी। छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय हो गए थे और कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने छात्र चुनाव भी लड़े और युवाओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
कांग्रेस पार्टी ने उन्हें पहली बार वर्ष 2017 में तलवंडी साबो विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार प्रोफेसर बलजिंदर कौर के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद पार्टी ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्हें जिला कांग्रेस देहाती का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया और क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत की। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर उन्हें टिकट देकर मैदान में उतारा, लेकिन इस बार भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2027 में लड़ते विधानसभा चुनाव
इस दौरान तलवंडी साबो से चार बार विधायक रह चुके जीत महिंदर सिंह सिद्धू कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दोनों नेताओं के बीच समझौता कराया।
समझौते के तहत तय हुआ कि वर्ष 2027 में खुशबाज जटाणा तलवंडी साबो से चुनाव लड़ेंगे, जबकि जीत महिंदर सिंह सिद्धू मौड़ विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार होंगे।
करनाल के पास हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि जटाणा ने 2027 चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी थीं और क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे। हादसे वाले दिन वे अपनी डिफेंडर गाड़ी से दिल्ली से बठिंडा लौट रहे थे, तभी करनाल के पास उनका एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई।
उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। जटाणा अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। उनकी असमय मृत्यु को कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।