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46 महीने बाद पटरी पर लौटेगी कांगड़ा घाटी नैरोगेज ट्रेन:2 जून से शुरू होने की संभावना; पठानकोट से हिमाचल का सफर होगा सुगम

पठानकोट  , (PNL) :  पंजाब एक बार फिर रेलमार्ग के रास्ते हिमाचल से जुड़ने जा रहा है। करीब 46 महीने से बंद पड़ी ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी नैरोगेज रेल सेवा एक बार फिर पटरी पर लौटने जा रही है। रेलवे की हायर अथॉरिटी ने ट्रेन संचालन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं और सूत्रों के मुताबिक 2 जून से ट्रेन चलाने को लेकर कभी भी आधिकारिक आदेश जारी किया जा सकता है। लंबे इंतजार के बाद यह खबर लाखों यात्रियों, दैनिक सफर करने वालों, कारोबारियों और पर्यटन उद्योग के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। हालांकि, इसमें निराशा इस बात की है कि ट्रेन एक बार फिर सिटी रेलवे स्टेशन से ही चलेगी।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को सेक्शन में मौजूद सभी तकनीकी और परिचालन संबंधी कमियां जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रैक, सिग्नलिंग और स्टेशन व्यवस्था की समीक्षा लगातार की जा रही है ताकि ट्रेन संचालन शुरू होने के बाद किसी प्रकार की दिक्कत न आए।

पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल लाइन पर दौड़ती ट्रेन। (फाइल))

अगस्त 2023 से बंद है पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल सेवा

बता दें कि 20 अगस्त 2023 को भारी बारिश और तेज बहाव के कारण चक्की रेलवे पुल के दो पिलर पानी में बह गए थे। इसके बाद पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेल सेवा पूरी तरह बंद हो गई थी। इस रेल ट्रैक के बंद होने से हिमाचल और पंजाब के हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई। दैनिक यात्रियों को महंगे किराए पर सफर करना पड़ा, जबकि पर्यटन कारोबार को भी बड़ा झटका लगा।

70 करोड़ रुपये की लागत से बना नया रेलवे पुल

रेलवे ने हादसे के बाद करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक तकनीक के साथ नया रेलवे पुल तैयार किया। फरवरी 2026 में ही रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा पुल का निरीक्षण कर उसे पूरी तरह सुरक्षित और फिट घोषित कर दिया गया था। इसके बावजूद ट्रेन सेवा शुरू न होने से लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही थी। अब रेलवे ने आखिरकार सेवा बहाल करने की दिशा में गंभीर कदम बढ़ा दिए हैं।

पठानकोट के कारोबार को भी मिलेगा सहारा

पठानकोट का लगभग 70 प्रतिशत कारोबार हिमाचल प्रदेश से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में नैरोगेज रेल सेवा शुरू होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। व्यापारियों को उम्मीद है कि ट्रेन चलने से बाजारों में रौनक लौटेगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। करीब चार साल बाद नैरोगेज ट्रेन की वापसी सिर्फ रेल सेवा की बहाली नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों, पर्यटन और कारोबार को दोबारा पटरी पर लाने की शुरुआत मानी जा रही है।

पहले चरण में सीमित ट्रेनें चलने के संकेत

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सामान्य दिनों में इस सेक्शन पर रोजाना सात ट्रेनें पठानकोट से हिमाचल की ओर जाती हैं और इतनी ही वापस लौटती हैं। हालांकि पहले चरण में कितनी ट्रेनें चलाई जाएंगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रेलवे संभवतः चरणबद्ध तरीके से सेवा शुरू करेगा।

4 साल तक यात्रियों पर पड़ी किराए की मार

नैरोगेज ट्रेन बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी दैनिक यात्रियों को उठानी पड़ी। ट्रेन और सड़क मार्ग के किराए में करीब छह गुना तक का अंतर होने के कारण लोग वर्षों से रेल यात्रा को प्राथमिकता देते थे। लेकिन सेवा बंद होने के बाद लोगों को मजबूरी में महंगी बसों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा।

डलहौजी रोड नहीं, पठानकोट सिटी स्टेशन से चलेगी ट्रेन रेलवे सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में ट्रेन को डलहौजी रोड स्टेशन से चलाने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन अब इस योजना को लगभग खत्म कर दिया गया है। रेलवे ने ट्रेन सेवा को पहले की तरह पठानकोट सिटी स्टेशन से ही संचालित करने का फैसला लिया है। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा।

फिर लौटेगा वादियों का सफर

कांगड़ा घाटी नैरोगेज रेल सेवा सिर्फ एक यातायात साधन नहीं, बल्कि हिमाचल की खूबसूरत वादियों का रोमांचक सफर मानी जाती है। हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक पठानकोट पहुंचकर इस ट्रेन से हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। ट्रेन सेवा बंद होने के कारण पर्यटकों को महंगे दामों पर टैक्सियां हायर करनी पड़ रही थीं। अब ट्रेन दोबारा शुरू होने से पर्यटन उद्योग को नई उड़ान मिलने की उम्मीद है।

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