न्यूज डेस्क, (PNL) : हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए गए एंट्री टैक्स के विरोध में सोमवार को पंजाब और हरियाणा के विभिन्न संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। रोपड़-नालागढ़ मार्ग पर स्थित ढेरोवाल हिमाचल एंट्री बैरियर पर कई यूनियनों ने रोष प्रदर्शन किया। इस चक्का जाम के कारण दोनों राज्यों की सीमा पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस रोष प्रदर्शन में टैक्सी यूनियन, ट्रक यूनियन और विभिन्न किसान संगठन मुख्य रूप से शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसी भी कमर्शियल या निजी वाहन को हिमाचल प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं को जाम से पूरी तरह मुक्त रखा गया।
नारेबाजी करते हुए किसान।
मौके पर लगी लोगों की भीड़।
अब जानें चक्का जाम और मुख्य बातें:
समय और स्थान: यह नाकाबंदी सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित है, जो हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा से जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर लगाए जाएंगे।
समर्थन देने वाले संगठन: इस विरोध प्रदर्शन को पंजाब मोर्चा, कीर्ति किसान मोर्चा, शेर-ए-पंजाब किसान यूनियन और बीकेयू (बेहरामके) जैसे संगठनों का समर्थन प्राप्त है। बाबा अच्छर सिंह महाकाल के नेतृत्व वाले निहंग समूहों ने भी अपना समर्थन दिया है।
विरोध का कारण: यह आंदोलन हिमाचल प्रदेश के वर्ष 2026-27 के संशोधित टोल और एंट्री टैक्स ढांचे के कारण शुरू हुआ है।
टैक्स में बढ़ोतरी का गणित: हिमाचल प्रदेश टोल एक्ट, 1975 के तहत, राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से हल्के मोटर वाहनों के लिए प्रवेश शुल्क 70 रुपए से बढ़ाकर 170 रुपए करने का प्रस्ताव दिया था। केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान बंद किए जाने के बाद, वित्तीय तनाव का हवाला देते हुए कमर्शियल वाहनों के लिए यह शुल्क बसों के लिए 600 रुपए और भारी माल वाहनों के लिए 900 रुपए प्रति दिन तक तय किया गया था।
पहले भी हुए थे प्रदर्शन: इस बढ़ोतरी के कारण पहले भी विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिससे नंगल-ऊना मार्ग (मेहतपुर टोल प्लाजा के पास) और चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग (कीरतपुर साहिब) जैसे प्रमुख कॉरिडोर पर चक्का जाम हुआ और यातायात बाधित हुआ।
सरकार का आंशिक रोलबैक
भारी दबाव के बाद, हिमाचल सरकार ने बाद में यात्री वाहनों के लिए टोल घटाकर 100 रुपए प्रति दिन कर दिया और यह दर 12 सीटों तक की क्षमता वाले गैर-हिमाचली वाहनों पर भी लागू कर दी। इसके अलावा, टोल प्लाजा के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों को रियायती टोकन की पेशकश की गई।
प्रदर्शनकारी क्यों हैं असंतुष्ट?
प्रदर्शनकारी इस आंशिक कटौती से संतुष्ट नहीं हैं। पंजाब मोर्चा के अध्यक्ष गौरव राणा ने कहा कि यह रोलबैक नाकाफी है। ऐसी भी शिकायतें हैं कि संशोधित आदेशों के बावजूद ठेकेदार अभी भी अधिक दरें वसूल रहे हैं। हमारी मांग है कि एंट्री टैक्स को पूरी तरह से वापस लिया जाए।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि एनएचएआई की सड़कों पर टोल बैरियर अवैध हैं। नंगल के एडवोकेट उताश मोगा ने पंजाब में प्रवेश करने वाले हिमाचल सरकार और निजी वाहनों पर पारस्परिक कर लगाने का एक मसौदा प्रस्ताव भी जारी किया है।
एक देश में कैसा एंट्री टैक्स? यह सरासर असंवैधानिक
टोल टैक्स और बैरियर पर धरने पर बैठे विभिन्न यूनियनों के नेताओं ने हिमाचल की सुक्खू सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान और ट्रांसपोर्ट नेताओं ने कहा कि जब पूरा देश एक है, तो देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए इस तरह का टैक्स वसूलना पूरी तरह से असंवैधानिक है। हिमाचल सरकार का यह फैसला आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स की जेब पर सीधा डाका है।
नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इससे पहले भी सरकार को शांतिपूर्ण तरीके से चेताया गया था, लेकिन सुक्खू सरकार के अड़ियल रवैये के कारण वे आज दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सीधा आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार ऐसे मनमाने फैसले लेकर पंजाब-हिमाचल के लोगों के बीच आपसी विवाद पैदा करना चाहती है।
उन्होंने साफ किया कि पंजाब और हिमाचल के लोग आपस में भाई-भाई हैं। हमारा विरोध वहां की आम जनता से नहीं, बल्कि सरकार की गलत और जन-विरोधी नीतियों से है। अगर यह टैक्स तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा।