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पंजाब में जंगल को आग लगाई तो होगा एक्शन:पकड़े जाने पर 25 हजार जुर्माना, छह साल की जेल भी , हेल्पलाइन जारी

चंडीगढ़ , (PNL) : पंजाब में गर्मी के मौसम में जंगलों और वहां पर रहने वाले जीव-जंतुओं को आग से बचाने के लिए फायर विभाग आगे आया है। विभाग ने लोगों को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें साफ किया गया है कि यात्री या जंगलों के पास रहने वाले लोग जलती हुई माचिस की तीली, बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े वनों में न फेंकें, क्योंकि इनसे आग लगने का खतरा बना रहता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर जंगलों में आग लगाता है, तो उसे 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और दोषी पाए जाने पर छह साल तक की सजा हो सकती है।

अब तीन प्वाइंटों में जाने आदेश में क्या कहा हैं

1. किसान पराली न जलाएं

किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को आग न लगाएं। पराली जलाने से आग आसपास के वनों तक फैल सकती है, जिससे वन संपदा और वन्यजीवों को भारी नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही यह वायु प्रदूषण को भी बढ़ाता है।

2. बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े न फेंकें

यात्रियों और जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जलती हुई माचिस की तीली, बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े वनों में न फेंकने की अपील की गई है, क्योंकि इससे भी आग लगने का खतरा रहता है।

3. लोग सहयोग करें, वन विभाग को सूचित करें

आग लगने की स्थिति में स्थानीय निवासियों, पंचायतों और वन सुरक्षा समितियों से सहयोग करने की अपील की गई है। साथ ही, ऐसी किसी भी घटना की तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के लिए कहा गया है। वहीं, लोगों को हेल्पलाइन नंबर: 1800-180-2323 (24 घंटे उपलब्ध) या ईमेल forestfirecontrol@gmail.com से संपर्क करना होगा।

पंजाब वन विभाग के गार्ड को अलर्ट करते हुए।

पंजाब वन विभाग के गार्ड को अलर्ट करते हुए।

3,084 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन है

राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 50,362 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 3,084 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कानूनी रूप से अधिसूचित वन क्षेत्र के रूप में शामिल है। राज्य में सबसे अधिक वन क्षेत्र होशियारपुर जिले में स्थित है, जहां शिवालिक की पहाड़ियां वन संपदा और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पंजाब के वनों में मुख्य रूप से शीशम, खैर और यूकेलिप्टस जैसे वृक्ष पाए जाते हैं, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

राज्य में हरित क्षेत्र को बढ़ाने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने वर्ष 2030 तक वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए वनरोपण, कृषि वानिकी और सामुदायिक भागीदारी जैसी विभिन्न पहलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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