न्यूज डेस्क, (PNL) : पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ ने कनाडा के शो में अपने दोस्त तजिंदर सिंह कोहली को लोगों के रू-ब-रू करवाया। दिलजीत ने कहा कि ये वो लड़ता है जिसने पंजाब में बाढ़ के दिनों में काम किया। ये 6 महीने तक अपने घर नहीं गया। मैंने इलेक्शन नहीं लड़ता है और न ही किसी से वोट लेने हैं।मैं पंजाब के साथ खड़ा था और खड़ा रहूंगा जिसने जो कहना है कह ले। इसके साथ ही दिलजीत ने कहा कि मैं और तजिंदर बचपन से साथ पढ़े हैं। जो सब्जेक्ट मैं लेता था वही तजिंदर लेता था। मैं भी ज्यादा नहीं पढ़ा और ये भी ज्यादा नहीं पढ़ा लेकिन हिसाब किताब का पक्का है। बाढ़ के दौरान इसने जो भी काम किया उसका भी पक्का हिसाब-किताब रखा है। जिसने हिसाब लेना हो इससे आकर ले जाए। दिलजीत सिंह ने कहा कि उसे तजिंदर सिंह के साथ बिताए संघर्ष के वो दिन आज भी याद हैं। दिलजीत ने कहा कि एक वक्त ऐसा भी था कि मेरे पास गीत की रिकॉर्डिंग करने जाने के लिए किराया देने के लिए पैसे नहीं होते है। उस समय यही तजिंदर मुझे 100 रुपए किराया देता था।
सिंगर दिलजीत सिंह दोस्त तजिंदर सिंह कोहली के साथ।
दिलजीत ने चाइल्डहुड फ्रेंड के बारे बताई अहम बातें…
मैं और तजिंदर बचपन से दोस्त हैं- दिलजीत ने बताया कि मेरी और हजिंदर सिंह कोहली की दोस्ती महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि बचपन से बुना गया एक अटूट विश्वास है। इस साथ की शुरुआत आठवीं कक्षा से हुई थी, जहां एक ही स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद दोस्ती ऐसी हुई कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव को भी साथ साझा किया। आठवीं, नौवीं और दसवीं के सफर के बाद जब पारिवारिक और आर्थिक तंगी के कारण मुझे ग्यारहवीं की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी, तो तजिंदर सिंह कोहली ने भी बिना किसी स्वार्थ के अपना रास्ता वही चुना जो मैंने चुना। उसने कभी अपने करियर या भविष्य की चिंता नहीं की।
नि:स्वार्थ सेवा में तजिंदर का कोई मुकाबला नहीं- सामाजिक उत्तरदायित्व की बात करें तो तजिंदर सिंह कोहली का नाम पंजाब की निस्वार्थ सेवा में पहली पंक्ति में आता है। जब पंजाब बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा था, तब तजिंदर ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए लगातार 6 महीने अपने घर का मुंह नहीं देखा। वह दिन-रात ज़मीनी स्तर पर लोगों की मदद और राहत कार्यों में जुटा रहा। आज जो लोग उनके सेवा भाव पर सवाल उठाते हैं या किए गए कामों का हिसाब मांगते हैं, उन्हें तजिंदर और उनके मित्र का साफ संदेश है कि उनका मकसद राजनीति में आना या वोट बटोरना कभी था ही नहीं। वे किसी चुनाव में खड़े होने के लिए नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और पंजाब के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मैदान में डटे रहे। वे आलोचनाओं और गालियों की परवाह किए बिना केवल सेवा धर्म में विश्वास रखते हैं।
मैं किराया भी तजिंदर से लेकर जाता था- दिलजीत ने बताया कि तजिंदर सिंह कोहली की शख्सियत का सबसे भावुक पहलू वह दौर है जब मैं अपने संघर्ष के दिनों से गुजर रहा था। उस कठिन समय में जब जेब में 100 भी नहीं होते थे और म्यूजिक कंपनियों के चक्कर काटने के लिए बस के किराए तक की मोहताजी थी, तब तजिंदर ही वह सहारा बना जिसने अपनी जेब से पैसे देकर मेरे सपनों को टूटने नहीं दिया। उसने केवल आर्थिक मदद ही नहीं की, बल्कि जिंद-जान बनकर साथ खड़े रहने का जो हौसला दिया, उसी की बदौलत आज वे इस मुकाम पर हैं।