चंडीगढ़ में आउटसोर्स भर्ती में ₹200 करोड़ का घोटाला:विजिलेंस की सिफारिश पर कार्रवाई नहीं; प्रशासन के अफसरों ने दबा दी फाइल
Punjab News Live -PNL
October 17, 2026
चंडीगढ़, ताजा खबर, पंजाब
चंडीगढ़ , (PNL) : चंडीगढ़ प्रशासन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें वेतन देने के नाम पर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले का आरोप लग रहा है। शुक्रवार को सीबीआई की रेड के बाद इस मामले में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, चंडीगढ़ विजिलेंस के पास भी इस मामले की जांच पहुंची थी। विजिलेंस ने 7 मई 2026 को संदीप बंसल समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद फाइल प्रशासन के अधिकारियों के पास भेज दी गई, लेकिन आरोप है कि उस पर कार्रवाई करने के बजाय फाइल दबा दी गई।
अब सीबीआई की जांच के दायरे में उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी आ सकती है, जिनके पास कार्रवाई की सिफारिश वाली फाइल पहुंची थी। कंपनी के मालिक संदीप बंसल की प्रशासन के कुछ वरिष्ठ और राजपत्रित अधिकारियों से नजदीकी बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार आउटसोर्स के जरिए नौकरी पर रखे गए युवाओं और अन्य लोगों से कथित तौर पर 2 लाख से ढाई लाख रुपए तक लिए जाते थे। इन कर्मचारियों का वेतन 20 से 25 हजार रुपए प्रति माह बताया जा रहा है। आरोप है कि कुछ लोगों को जाली दस्तावेजों के आधार पर भी नौकरी पर रखा गया।
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रशासन की ओर से कंपनियों को जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कंपनियों ने जिन कर्मचारियों को नौकरी पर रखा, उनके दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी किसकी थी। यदि किसी कर्मचारी को जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त किया गया, तो संबंधित कंपनी और दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय होगी।चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया नगर निगम की हाउस मीटिंग में भी कर्मचारियों की संख्या और शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठा चुके हैं। पहली बार हाउस मीटिंग में शामिल होने के दौरान उन्होंने कहा था कि जब शहर में सफाई कर्मचारियों की संख्या करीब 250 थी, तब भी सफाई व्यवस्था ऐसी ही थी। अब कर्मचारियों की संख्या 800 से ज्यादा होने के बावजूद स्थिति में खास बदलाव नहीं दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा, तो इतने कर्मचारियों को रखने का क्या फायदा है।
जिन चार एजेंसियों के ठिकानों पर कार्रवाई की, उनमें जाहरवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विसेज और किम्सी एंटरप्राइजेज शामिल हैं। एजेंसियां चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों और संस्थानों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों सहित आउटसोर्स मैनपावर उपलब्ध करवाती हैं।इन चारों ग्रुप से जुड़े करीब 30 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। जांच में एजेंसियों को दिए गए सरकारी टेंडर, कर्मचारियों की भर्ती के दस्तावेज, वेतन भुगतान और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सीबीआई यह जांच कर रही है कि टेंडर आवंटन और भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या नहीं। अभी जांच एजेंसी ने घोटाले की पुष्टि नहीं की है और आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट नहीं हुई है।
चंडीगढ़ प्रशासन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने वाली फर्मों के खिलाफ शिक्षा विभाग की ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन ने सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच में शिकायत दी थी। शिकायत में संदीप मलिक, उनके भाई विकास मलिक और बहन रेखा से जुड़ी फर्मों का जिक्र किया गया है।यूनियन ने आरोप लगाया है कि चंडीगढ़ प्रशासन में मैनपावर उपलब्ध कराने से जुड़े करीब 70% टेंडर फर्मों को दिए जा रहे हैं। शिकायत में सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की भर्ती, टेंडर आवंटन और वेतन भुगतान में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है।
यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद GeM पोर्टल की प्रक्रिया का हवाला देकर शिकायतों को दबा दिया जाता है। सीबीआई जांच करेगी कि कंपनियों को टेंडर कैसे दिए गए, दूसरी कंपनियों को मौका मिला या नहीं और इसमें अधिकारियों की क्या भूमिका रही।शिकायत में कई सरकारी विभागों और संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जारी टेंडरों का भी जिक्र किया गया है। इनमें सेक्टर-11 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज फॉर मेन, सेक्टर-46 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, बुड़ैल जेल, चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और खेल विभाग शामिल हैं। यूनियन ने इन संस्थानों में जारी टेंडरों और भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग की है।