जालंधर , (PNL) : अमेरिका के 6,00,000 डॉलर (लगभग ₹5.6 करोड़) के सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP) घोटाले में वांछित और FBI की ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची में शामिल मनजीत सिंह बेदी को पंजाब पुलिस और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से गिरफ्तार कर अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है। बेदी वाशिंगटन के टकोमा में ग्रोसरी स्टोर चलाता था। उस पर गरीबों के लिए तय खाद्य सहायता फंड में धोखाधड़ी करने का संगीन आरोप है। अप्रैल 2026 में अमेरिकी अदालत में वायर फ्रॉड मामले में खुद को निर्दोष बताने के बाद वह जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कनाडा के रास्ते भागकर भारत (जालंधर) आकर छिप गया था। FBI ने 3 सितंबर, 2026 को उसे ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ की सूची में शामिल किया।सूचना मिलते ही जालंधर पुलिस और भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए बेदी को हिरासत में ले लिया और 15 अक्टूबर को अमेरिकी एजेंटों के हवाले कर दिया। बेदी अब वाशिंगटन के वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट पहुंच चुका है, जहां टकोमा स्थित U.S. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में उस पर मुकदमा चलाया जाएगा। FBI डायरेक्टर काश पटेल और U.S. अटॉर्नी कार्यालय ने इस प्रत्यर्पण की पुष्टि करते हुए पंजाब पुलिस और भारतीय एजेंसियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने मनजीत बेदी के अमेरिका पहुंचने के बाद प्रेस रिलीज जारी की
मनजीत बेदी के भारत से अमेरिका प्रत्यर्पण की कहानी…
मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स सूची में था नाम: पंजाब के जालंधर का रहने वाला 64 वर्षीय मनजीत सिंह बेदी FBI की ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची में शामिल था। बेदी अमेरिका के लिए हाई-वैल्यू टारगेट बन चुका था। उस पर अमेरिका में गरीब नागरिकों के लिए चलाई जाने वाली सरकारी खाद्य योजना में लाखों डॉलर के गबन का गंभीर आरोप है।
सूची में शुरुआत में 8 नाम शामिल थे: 4 जून, 2026 को FBI ने विशेष रूप से आर्थिक अपराधों और करदाताओं के पैसे की लूट में शामिल भगोड़ों को बेनकाब करने के लिए ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ नामक एक नई सूची जारी की थी। इस सूची में शुरुआत में 8 नाम शामिल थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 18 कर दिया गया।
अमेरिकी एजेंसियों ने भारत को सौंपी लिस्ट: अमेरिका सरकार ने मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स की सूची भारत सरकार को भी सौंपी थी। जालंधर के रहने वाले मनजीत सिंह बेदी का नाम इस सूची में 3 सितंबर, 2026 को शामिल किया गया और उसकी तस्वीरें व अपराध का ब्योरा दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजा गया।
पुलिस के साथ खुफिया जानकारी साझा की: जैसे ही FBI ने भारत में अपनी सहयोगी एजेंसियों और पंजाब पुलिस के साथ खुफिया जानकारी साझा की, भारतीय अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई की। सितंबर में ही जालंधर में बेदी के ठिकानों पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया गया।
अमेरिकी एजेंसियों को सौंपा बेदी: पंजाब पुलिस और प्रत्यर्पण एजेंसियों ने प्रत्यर्पण की कागजी कार्रवाई और कानूनी औपचारिकताओं को रिकॉर्ड समय में पूरा करते हुए उसे अमेरिकी संघीय एजेंटों (FBI) के हवाले कर दिया। 15 अक्टूबर को बेदी को कड़ी सुरक्षा के बीच वाशिंगटन पहुंचाया गया। अब उसे टकोमा स्थित U.S. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।
मुकदमा चलने तक उसे हिरासत में रखने की अपील: U.S. अटॉर्नी कार्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे अदालत से बेदी की जमानत याचिका खारिज कर मुकदमा चलने तक उसे हिरासत में रखने की अपील करेंगे, क्योंकि आरोपी पहले भी देश छोड़कर भागने की क्षमता और नीयत साबित कर चुका है।
बढ़ते तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण: अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रत्यर्पण अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के बीच बढ़ते तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। FBI के अनुसार, बीते 20 महीनों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए 260 से अधिक भगोड़ों को अमेरिका वापस लाया जा चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 70% अधिक है।
मनजीत बेदी पर क्या आरोप हैं, जानिए…
फर्जी ग्रोसरी स्टोर और EBT कार्ड का दुरुपयोग: आरोप-पत्र के अनुसार, बेदी वाशिंगटन राज्य के टकोमा में एक छोटा ग्रोसरी स्टोर चलाता था। फरवरी 2024 में उसकी दुकान को कम आय वाले अमेरिकियों के लिए चलाई जाने वाली SNAP योजना के तहत खाद्य सामग्री बेचने के लिए अधिकृत किया गया था। लाभार्थियों को सरकार द्वारा ‘इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट्स ट्रांसफर’ (EBT) कार्ड जारी किए जाते हैं, जिनका उपयोग केवल राशन या खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए किया जा सकता है।
50% कट-मनी घोटाला: आरोपी ने मार्च 2024 से जून 2025 के दौरान SNAP लाभार्थियों के साथ सांठगांठ की। बेदी लाभार्थियों के EBT कार्ड से पूरी राशि स्वाइप/चार्ज करता था, लेकिन उन्हें कोई राशन या सामान नहीं देता था। इसके बदले वह लाभार्थियों को कुल राशि का 50% नकद दे देता था और बाकी 50% हिस्सा खुद अपनी जेब में रख लेता था।
6,00,000 डॉलर की अवैध कमाई: मार्च 2024 से जून 2025 के बीच बेदी ने बिना कोई सामान बेचे SNAP फंड से कम से कम 6,00,000 डॉलर की अवैध कमाई कर ली। अमेरिकी कानून के तहत, वायर फ्रॉड और SNAP बेनिफिट फ्रॉड दोनों ही गंभीर संघीय अपराध हैं। यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो बेदी को 20 साल तक की जेल और 2,50,000 डॉलर (लगभग ₹2.1 करोड़) तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
जालंधर पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। -फाइल फोटो
गिरफ्तारी तक की पूरी कहानी, जानिए…
2019 में गया था अमेरिका: मनजीत सिंह बेदी वर्ष 2019 में भारत से अमेरिका गया था। उसके दोनों बेटे अमेरिका में ही बसे हुए हैं। इसी आधार पर वह वहां जाकर रहने लगा और टकोमा में व्यापार शुरू किया।
घोटाले का पर्दाफाश: प्रेस रिलीज के मुताबिक, जब अमेरिकी कृषि विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय, FBI और वाशिंगटन राज्य के सामाजिक एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग ने बेदी के ग्रोसरी स्टोर के खातों में गड़बड़ी पाई, तो जांच शुरू की गई। जून 2025 में घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद बेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
हिरासत से बाहर रहने की अनुमति दी: 22 अप्रैल, 2026 को बेदी वाशिंगटन की अदालत में पेश हुआ, जहां उसने खुद को ‘निर्दोष’ बताया। अदालत ने उसे कुछ शर्तों के आधार पर हिरासत से बाहर रहने की अनुमति दी। उसे अपना पासपोर्ट अदालत में सरेंडर करने और वाशिंगटन राज्य की सीमा से बाहर न जाने का निर्देश दिया गया।
कनाडा के रास्ते भारत पहुंचा: अदालत में पेश होने के महज एक हफ्ते के भीतर ही बेदी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया। वह कथित तौर पर वाशिंगटन से निकलकर कनाडा में दाखिल हुआ और वहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए भारत पहुंच गया। 21 मई, 2026 को अमेरिकी जिला अदालत ने निगरानी की शर्तों का उल्लंघन करने पर बेदी के खिलाफ गैर-जमानती फेडरल अरेस्ट वारंट जारी किया।
जालंधर में पनाह और स्थानीय पुलिस का शिकंजा: भारत पहुंचने के बाद बेदी पंजाब के जालंधर स्थित अपने पैतृक निवास और रिश्तेदारों के ठिकानों पर छिपकर रहने लगा। इस दौरान, उसके खिलाफ जालंधर के रामा मंडी पुलिस स्टेशन में ट्रैवल फ्रॉड का मामला भी दर्ज हुआ। इसमें उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2) (आपराधिक विश्वासघात), 318(4) (धोखाधड़ी) और पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट की धारा 13 के तहत केस दर्ज किया गया।
पंजाब पुलिस ने बेदी को गिरफ्तार कर लिया: 3 सितंबर, 2026 को अमेरिका की ओर से सूचना जारी होने के बाद जालंधर पुलिस और भारतीय केंद्रीय जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं। जालंधर पुलिस ने बेदी के अंतरराष्ट्रीय यात्रा रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की। स्थानीय खुफिया जानकारी और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पंजाब पुलिस ने बेदी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों को सूचित किया गया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बेदी को FBI के सुपुर्द कर दिया गया, जिसके बाद उसे अमेरिका वापस ले जाया गया।