पंजाब पुलिस ने वल्टोहा सरपंच हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई, दो शूटरों सहित सात गिरफ्तार
Punjab News Live -PNL
January 12, 2026
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चंडीगढ़, (PNL) : वल्टोहा के पूर्व सरपंच झरमल सिंह की हत्या की गुत्थी को महज़ कुछ ही दिनों में सुलझाते हुए, कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने प्रभ दासूवाल गैंग को करारा झटका देते हुए गैंग के दो शूटरों सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने संगठित अपराध के विरुद्ध मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए कहा कि पंजाब में सक्रिय अपराधी नर्क में भी नहीं छिप सकेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब पुलिस हिंसक गतिविधियों में शामिल हर व्यक्ति को देश में या देश से बाहर किसी भी कोने से पकड़कर कानून के कटघरे में लाएगी।
पुलिस जांच के अनुसार इस हत्या का मास्टरमाइंड गैंगस्टर प्रभ दासूवाल है, जिसने पुरानी रंजिश के चलते योजनाबद्ध और लक्षित तरीके से इस हत्या को अंजाम दिया। डीजीपी, जिनके साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (काउंटर इंटेलिजेंस) अमित प्रसाद, पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय) डॉ. सुखचैन सिंह गिल और पुलिस आयुक्त अमृतसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर मौजूद थे, ने बताया कि इस मामले में मिली त्वरित सफलता संगठित अपराध के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करने के प्रति पंजाब पुलिस के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुखराज सिंह उर्फ गूंगा (20) निवासी ठक्करपुरा, तरनतारन; करमजीत सिंह (23) निवासी गांव पसनावाल, गुरदासपुर; जोबनप्रीत सिंह (19) निवासी गांव भाई लद्धू, तरनतारन; हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी (27) निवासी गांव बहादर नगर, तरनतारन; जोबनप्रीत सिंह (20), कुलविंदर सिंह उर्फ किंदा (20) और अरमानदीप सिंह (18), तीनों निवासी गांव कलसियां कलां, तरनतारन के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि सुखराज सिंह उर्फ गूंगा का आपराधिक रिकॉर्ड है और उसके विरुद्ध चोरी तथा आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं, साथ ही वह सरपंच राजविंदर सिंह उर्फ राज हत्याकांड में भी शामिल रहा है।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि जांच से यह सामने आया है कि गैंगस्टर प्रभ दासूवाल की मृतक पूर्व सरपंच के साथ पुरानी दुश्मनी थी और उसने पहले भी उस पर गोलीबारी की थी, जो स्पष्ट रूप से एक योजनाबद्ध और सुनियोजित साजिश की ओर संकेत करता है। उन्होंने कहा कि इस केस को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया गया और हत्या की जांच के लिए कई विशेष टीमों का गठन किया गया था।
डीजीपी ने बताया कि तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस टीमों ने अपराध में शामिल दोनों शूटरों—सुखराज सिंह उर्फ गूंगा और करमजीत सिंह—की पहचान की।
उन्होंने कहा कि लगातार अंतर-राज्यीय समन्वय, खुफिया एजेंसियों की अगुवाई वाली ट्रैकिंग तथा केंद्रीय एजेंसियों और छत्तीसगढ़ पुलिस के करीबी सहयोग से दोनों शूटरों को रायपुर, छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने आगे बताया कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पंजाब और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में जानबूझकर ठिकाने बदल रहे थे और अपनी पहचान छिपाने तथा पुलिस गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल कर रहे थे।
डीजीपी ने बताया कि एक अन्य पुलिस टीम ने एसएसओसी मोहाली की मदद से दो और आरोपियों (दोनों का नाम जोबनप्रीत सिंह) को मोहाली से गिरफ्तार किया है। हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी को वल्टोहा से गिरफ्तार किया गया, जबकि कुलविंदर सिंह उर्फ किंदा और अरमानदीप सिंह को तरनतारन के भिखीविंड क्षेत्र से पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि इन पांचों आरोपियों ने शूटरों को रसद, पनाह, हथियार और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराकर साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि गोली चलाने वाले और लॉजिस्टिक सहायता देने वाले आरोपी एक-दूसरे को नहीं जानते थे और प्रभ दासूवाल के निर्देशों पर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे।
अपराध के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने कहा कि नशा विरोधी मुहिम की सफलता के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार विदेशों में बैठे अपराधियों की प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करते हुए संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू करने जा रही है।
डीजीपी गौरव यादव ने सीमावर्ती राज्य से संगठित अपराध के खात्मे के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पंजाब में हिंसक गतिविधियों या गोलीबारी में शामिल हर व्यक्ति को पंजाब पुलिस देश में या देश से बाहर हर कोने से पकड़कर कानून के कटघरे में लाएगी।