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एचएमवी कॉलेज को ऑटोनॉमस बनाने की कोशिश निजी हितों से प्रेरित, एचएमवी यूनिट का आरोप, डीएवी मैनेजिंग कमेटी से शिक्षक-पक्षीय फैसले की पूरी उम्मीद

न्यूज डेस्क, (PNL) : पंजाब चंडीगढ़ कॉलेज टीचर्स यूनियन की एचएमवी यूनिट ने संस्थान को स्वायत्त (ऑटोनॉमस) बनाने की कोशिश को प्रिंसिपल के निजी हितों की उपज बताया है। यूनियन का कहना है कि प्रिंसिपल अपने सेवा काल को बढ़ाने के लिए कॉलेज को ऑटोनॉमस बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस संदर्भ में यूनियन के पदाधिकारियों व सदस्यों ने डीएवी मैनेजिंग कमेटी के अध्यक्ष पद्मश्री पूनम सूरी जी एवं पूरी प्रबंधन समिति से अपील की है कि वे एचएमवी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को ऑटोनॉमस जैसी नीतियों से दूर रखें।

एचएमवी एक ऐसा संस्थान है जिसने मेहनती शिक्षकों और पूरे स्टाफ के सहयोग से तीन बार ए++ का दर्जा प्राप्त कर इतिहास रचा है। अब इस संस्थान को ऑटोनॉमस बनाने की कोशिशों का विरोध करते हुए यूनियन ने बताया कि ऑटोनॉमस संस्थानों में परीक्षा प्रणाली की प्रक्रिया विद्यार्थियों को एक ही संस्थान तक सीमित कर देगी, जिससे उनकी अन्य संस्थानों के छात्रों से प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता घटेगी।

यह भी उल्लेखनीय है कि बोर्ड ऑफ स्टडीज़ और अन्य परीक्षात्मक खर्चों का आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जो विद्यार्थियों की फीस वृद्धि की ओर अगला कदम साबित हो सकता है। यह विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बनेगा।

गौरतलब है कि आज इस संघर्ष का दसवां दिन और भूख हड़ताल का पाँचवां दिन है। आज की भूख हड़ताल में डॉ. रमिंदर कौर, डॉ. दीपाली, डॉ. सिम्मी गर्ग, हरमनपाल, पवन कुमारी (सभी असिस्टेंट प्रोफेसर) शामिल हैं।

अध्यापक यूनियन के संघर्ष को गलत ठहराने वाली प्रिसिपल के बयान का विरोध करते हुए यूनियन ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष ऑटोनॉमस नीतियों के गहरे अध्ययन व विश्लेषण के बाद आरंभ किया गया है। पूरे देश की राष्ट्रीय स्तर की शिक्षक संगठन AIFUCTO भी लंबे समय से नई शिक्षा नीति विशेषकर ऑटोनॉमी के दुष्प्रभावों के विरोध में रैलियाँ व धरने कर रही है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऑटोनॉमस कॉलेजों द्वारा प्रदान की जाने वाली डिग्रियों को भारत और कुछ विदेशी विश्वविद्यालयों में मान्यता प्राप्त नहीं होती।

एचएमवी यूनियन ने दोहराया कि एचएमवी जैसी नामचीन संस्था को ऑटोनॉमस बनाने की कोशिशों का विरोध शिक्षित वर्ग की आवाज़ है और डीएवी मैनेजिंग कमेटी को इस शिक्षक वर्ग की आवाज़ को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि समिति इस संबंध में शिक्षकों के हित में निर्णय लेगी। 4 मई 2025 को होने वाली डीएवी मैनेजिंग कमेटी की मीटिंग में होने वाले फैसले के आधार पर ही अगली रणनीति तैयार की जाएगी।

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