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Jalandhar के कैप्टन हजारों मीट्रिक टन LPG लेकर पहुंचे भारत, परिवार ने बताया मुश्किलों भरा दौर

न्यूज डेस्क, (PNL) : उनके भारत पहुंचने पर परिवार में खुशी का माहौल देखने को मिला। परिवार के सदस्यों ने बताया कि कैप्टन सुखमीत सिंह 26 फरवरी को कतर पहुंचे थे और उसके बाद 28 फरवरी को ईरान पहुंचे थे। इज़राइल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जारी है। इसके कारण कई देशों में गैस, पेट्रोल और डीज़ल की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत में भी इस टकराव का असर देखने को मिल रहा है। एलपीजी गैस की सप्लाई में कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इस गैस संकट के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी से भरे दो जहाज गुजरात के एक बंदरगाह पर पहुंच गए हैं। इससे घरेलू गैस की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है, क्योंकि हजारों मीट्रिक टन एलपीजी अब भारत पहुंच चुकी है।इन जहाजों में से एक “शिवालिक” जहाज को कैप्टन सुखमीत सिंह भारत लेकर आए। सुखमीत सिंह जालंधर के आदमपुर के निवासी हैं। उनके भारत पहुंचने पर परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार के लोगों ने बताया कि कैप्टन सुखमीत सिंह 26 फरवरी को कतर पहुंचे थे और 28 फरवरी को ईरान पहुंचे।

कैप्टन सुखमीत सिंह की पत्नी ने बताई कहानी

आदमपुर (जालंधर) के लोगों के लिए यह गर्व और खुशी की बात है कि कैप्टन सुखमीत सिंह, जिन्होंने इन जहाजों में से एक की कमान संभाली थी, सुरक्षित और स्वस्थ वापस आ गए हैं। उनके परिवार ने भी उनकी सुरक्षित वापसी पर राहत की सांस ली है। उनके माता-पिता और पत्नी बहुत खुश हैं कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय टकराव के बावजूद वह बिना किसी नुकसान के वापस लौट आए और देश की सेवा के लिए हजारों मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आए। “शिवालिक” जहाज के कैप्टन सुखमीत सिंह की पत्नी संदीप कौर ने बताया कि जहाज 26 फरवरी को कतर पहुंचा और 28 फरवरी को ईरान पहुंचा। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी जहाज पर लोड किया गया। उसी दौरान ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच टकराव शुरू हो गया। संदीप कौर ने बताया कि शिपिंग कंपनी ने उन्हें दुबई जाने का आदेश दिया और भरोसा दिलाया कि वहां व्यवस्था की जाएगी। लेकिन उन्हें ईरान के पास ही रुकना पड़ा। अपनी कंपनी के जरिए उन्होंने भारतीय अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक प्रयास शुरू किए। आखिरकार 14 मार्च को ईरान ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसके बाद जहाज भारत के लिए रवाना हुआ और गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया।सुखमीत की पत्नी संदीप कौर ने बताया कि उन्होंने सुखमीत से छुट्टी लेकर घर आने के लिए भी कहा था। लेकिन सुखमीत ने साफ जवाब दिया कि वह अपने जहाज के साथ ही रहेंगे, क्योंकि उसे सुरक्षित अंतिम मंजिल तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। आज परिवार को इस बात पर गर्व है कि उन्होंने ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया और अब वह जल्द ही घर वापस आने वाले हैं।

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