सप्तक्रांति से मगध तक… इन ट्रेनों के नाम से हटेगा सुपरफास्ट का टैग, क्या होगा असर?
Punjab News Live -PNL
November 3, 2026
ताजा खबर, देश विदेश
न्यूज डेस्क, (PNL) : रेलवे ने कुछ प्रमुख ट्रेनों को सुपरफास्ट की श्रेणी से हटाकर सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में चलाने का फैसला किया है. इनमें सप्तक्रांति एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस और पूर्णागिरि जनशताब्दी जैसी ट्रेनें शामिल हैं. इस बदलाव के तहत ट्रेनों के नंबर भी बदले जाएंगे. नई व्यवस्था एक जनवरी से लागू होगी.
इसका सीधा असर बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और उत्तराखंड के बीच सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा. इस फैसले से यात्रियों को सबसे बड़ी राहत किराये में मिलेगी. दरअसल, सुपरफास्ट ट्रेनों में सामान्य किराये के अलावा अतिरिक्त सुपरफास्ट चार्ज भी देना पड़ता है. सामान्य एक्सप्रेस में बदलने के बाद यह चार्ज नहीं लगेगा.
रेलवे सुपरफास्ट ट्रेन किसे मानता है?
रेलवे में औसतन 55 किलोमीटर प्रति घंटे या इससे अधिक की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दिया जाता है. इन ट्रेनों के नंबर आमतौर पर 12 या 2 से शुरू होते हैं. सुपरफास्ट श्रेणी में होने के कारण यात्रियों को सामान्य टिकट किराये के साथ अतिरिक्त सुपरफास्ट चार्ज भी देना पड़ता है. यह चार्ज ट्रेन की श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग होता है.
अब जिन ट्रेनों का दर्जा घटाकर सामान्य एक्सप्रेस किया जाएगा, उनमें यह अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा. सुपरफास्ट ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को टिकट बुक करते समय सामान्य किराये के अलावा अधिभार देना पड़ता है. यह राशि अलग-अलग क्लास के हिसाब से तय है.
-
स्लीपर क्लास: 30 रुपये अतिरिक्त
-
एसी चेयरकार, थर्ड एसी और थर्ड एसी इकोनॉमी: 45 रुपये अतिरिक्त
-
सेकंड एसी: 45 रुपये अतिरिक्त
-
फर्स्ट एसी और एग्जीक्यूटिव क्लास: 75 रुपये अतिरिक्त
-
सामान्य एक्सप्रेस में बदलने के बाद संबंधित ट्रेनों में यह सुपरफास्ट चार्ज नहीं लगेगा. यानी यात्रियों को टिकट बुक करते समय इतनी राशि की बचत होगी. (हालांकि, कुल किराये में बदलाव टिकट की श्रेणी और रेलवे के लागू किराया नियमों पर निर्भर करेगा.)
रेलवे क्यों घटाता है ट्रेनों का दर्जा?
रेलवे समय-समय पर ट्रेनों की औसत रफ्तार और समय पर परिचालन की समीक्षा करता है. यह प्रक्रिया आमतौर पर सालाना आधार पर या नया टाइम टेबल तैयार करते समय होती है. कई बार ट्रेनों के रास्ते में ठहराव बढ़ा दिए जाते हैं. इससे उन्हें अलग-अलग स्टेशनों पर ज्यादा समय रुकना पड़ता है.
इसके अलावा रूट पर ट्रैफिक बढ़ने और परिचालन संबंधी दूसरी वजहों से भी ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित होती है. ऐसी स्थिति में ट्रेन लगातार देरी से चलने लगती है और उसकी औसत गति कम हो जाती है. रेलवे समीक्षा के बाद तय करता है कि ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में रखा जाए या सामान्य एक्सप्रेस में बदल दिया जाए.
किन प्रमुख ट्रेनों पर पड़ेगा असर?
रेलवे के फैसले से बिहार, दिल्ली, पंजाब और उत्तराखंड के बीच चलने वाली कई ट्रेनों का दर्जा बदलेगा. इनमें ये ट्रेनें शामिल हैं:
-
सप्तक्रांति एक्सप्रेस: आनंद विहार टर्मिनल-मुजफ्फरपुर
-
मगध एक्सप्रेस: इस्लामपुर-नई दिल्ली
-
अंत्योदय एक्सप्रेस: दरभंगा-जालंधर सिटी
-
अंत्योदय एक्सप्रेस: जालंधर सिटी-दरभंगा
-
सुपरफास्ट एक्सप्रेस: पाटलिपुत्र-चंडीगढ़
-
पूर्णागिरि जनशताब्दी: पुरानी दिल्ली-टनकपुर
-
नैनी जनशताब्दी: देहरादून-काठगोदाम
-
कॉर्बेट पार्क लिंक एक्सप्रेस: मुरादाबाद-रामनगर
इन ट्रेनों को सुपरफास्ट की जगह सामान्य एक्सप्रेस श्रेणी में चलाया जाएगा. हालांकि, उपलब्ध सूची में श्रमजीवी एक्सप्रेस का रूट नहीं दिया गया है, जबकि शुरुआती जानकारी में उसका नाम भी शामिल है. रेलवे का यह फैसला एक जनवरी से लागू होगा. इसके साथ ही संबंधित ट्रेनों के नंबर भी बदले जाएंगे. ऐसे में यात्रियों को टिकट बुक करते समय ट्रेन का नया नंबर जांचना होगा.