लुधियाना , (PNL) : पंजाब में लगातार बढ़ रही बिजली की डिमांड से इंडस्ट्री को पावर सप्लाई नहीं मिल रही। इंडस्ट्री ठीक से काम नहीं कर पा रही है। मंगलवार को लुधियाना के इडस्ट्रिलिस्ट चीफ इंजीनियर दफ्तर पहुंचे और उनसे पावर सप्लाई पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस को इंडस्ट्रिलिस्ट ने कहा कि जब भी राज्य में बिजली संकट होता है तो इसका खामियाजा सबसे पहले इंडस्ट्री को झेलना पड़ता है। पावरकॉम ने कैटागिरी-2 और कैटागिरी-3 को रात में पावर सप्लाई नहीं मिल रही, इस वजह से शहर की 80 फीसदी इंडस्ट्री रात को बंद है।
इंडस्ट्रिलिस्ट ने कहा कि रात को पावरकॉम ने शेड्यूल कट लगा दिए और दिन में अनशेड्यूल कट लगाए जा रहे हैं। जिसकी वजह से इंडस्ट्री पूरी तरह से बंद होने के कगार पर है। उनका कहना है कि अगर पावरकॉम के पास बिजली नहीं है तो मॉल-रेस्टोरेंट बंद करवाए। सिर्फ इंडस्ट्री ही बंद क्यों करवाई जा रही है।
बैठक में तीखी बहस के बाद चीफ इंजीनियर ने उद्यमियों को कहा कि सिर्फ दो दिन का टाइम दें, उसके बाद ऐसी स्थिति नहीं आएगी। चीफ इंजीनियर का कहना है कि पैडी सीजन के कारण बिजली की डिमांड बढ़ी है, जिसकी वजह से सप्लाई में दिक्कत आ रही है।
औद्योगिक संगठनों के नेताओं के साथ बैठक करते हुए चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस।
पावरकॉम ऐसे तो इंडस्ट्री को पक्का ताला लगवा देगा
इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के कुलवंत सिंह एनकेएच और रमेश गर्ग ने बैठक में कहा कि बिजली कट से इंडस्ट्री परेशान है। उन्होंने कहा कि शहर की 80 प्रतिशत इंडस्ट्री रात के शेड्यूल कट झेल रही है। पावरकॉम ने रात दस बजे से सुबह छह बजे तक कैटागिरी-2 और कैटागिरी-3 इंडस्ट्री पर पावरकट लगाया है। जिसका साफ मतलब है कि इंडस्ट्री को रात में फैक्ट्री बंद करनी पड़ेगी। इसके अलावा दिन में भी अन-शेड्यूल कट भी लग रहे हैं जिससे फैक्ट्रियों में नियमित तौर पर काम नहीं हो रहा है। पावर कट ने MSMEs को संकट की ओर धकेला
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (CICU) ने 11 KV श्रेणी के अंतर्गत आने वाले उद्योगों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर लगाए जा रहे लगातार और लंबे समय के बिजली कटों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसएिसशन का कहना है कि इंडस्ट्री इस समय अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रही है। CICU के अध्यक्षउपकार सिंह आहूजा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। MSMEs लेबर की कमी, मिडिल इस्ट संकट, फ्यूल की कमी समेत कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में बिजली कटौती ने एमएसएमई को बंद करने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
17 हजार मेगवाट के पार पहुंची बिजली की डिमांड
पंजाब में लगातार बिजली की डिमांड बढ़ती जा रही है। मंगलवार को बिजली की डिमांड 17000 मेगावाट के पार पहुंच गई। जबकि पंजाब में बिजली का उत्पादन 6 हजार मेगावाट के आसपास रहा। बाकी की बिजली आपूर्ति के लिए पावरकॉम को सेंट्रल पूल से 10 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली खरीदनी पड़ी। मंगलवार को हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से 950 मेगावाट के करीब बिजली पैदा की गई।
एग्रीकल्चरल सेक्टर को दी जा रही बिजली
अफसरों का कहना है कि पैडी सीजन के कारण अचानक बिजली की डिमांड बढ़ गई है। किसानों को बिजली सप्लाई दी जा रही है। इस वजह से डिमांड बढ़ रही है। पावरकॉम सेंट्रल पूल से बिजली खरीदकर डिमांड पूरी कर रहा है। अफसरों का कहना है कि कुछ ग्रिड ओवरलोड हो रहे हैं जिसकी वजह से सप्लाई सिस्टम प्रभावित हो रहा है।