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चंडीगढ़ एयरपोर्ट भ्रष्टाचार केस: जांच CBI को सौंपी, टैक्सी यूनियन ने लगाए परेशान करने के आरोप

चंडीगढ़ , (PNL) : चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े भ्रष्टाचार, रंगदारी और ब्लैकमेलिंग के आरोपों वाले मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की विजिलेंस जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह फैसला लिया गया। मामला एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन के सदस्यों के साथ मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न से जुड़ा बताया जा रहा है।

शिकायत के साथ ऑडियो क्लिप सौंपे

मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2024 को दी गई एक शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत के साथ एक पेनड्राइव भी दी, जिसमें कुछ ऑडियो क्लिप्स मौजूद थे। इन ऑडियो क्लिप्स में कथित तौर पर कुछ लोगों की बातचीत रिकॉर्ड है, जिनमें पैसे मांगने और दबाव बनाने जैसी बातें सामने आती हैं। यह शिकायत 26 अप्रैल 2024 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के कॉरपोरेट मुख्यालय, नई दिल्ली को मिली।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एयरपोर्ट से जुड़े कुछ अधिकारी टैक्सी यूनियन के सदस्यों पर दबाव बनाकर उनसे अवैध रूप से पैसे वसूल रहे थे। इसके अलावा, अगर कोई सदस्य पैसे देने से मना करता था, तो उसे अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जाता था और ब्लैकमेल करने की भी कोशिश की जाती थी।

इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारियों द्वारा एक खास लाइसेंसी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर पक्षपात किया जा रहा था। यानी उस कंपनी को काम दिलाने और बाकी लोगों को किनारे करने के लिए गलत तरीके अपनाए जा रहे थे।

विजिलेंस जांच में सामने आया भ्रष्टाचार का एंगल

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के विजिलेंस विभाग ने शिकायत मिलने के बाद सबसे पहले प्रारंभिक जांच शुरू की। इस दौरान उन्होंने शिकायत से जुड़े सभी दस्तावेज, फाइल नोटिंग्स, अधिकारियों के बीच हुई ईमेल बातचीत और पेन ड्राइव में दी गई ऑडियो क्लिप्स को ध्यान से जांचा।

जांच के दौरान यह सामने आया कि मामले में रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हो सकते हैं। कुछ रिकॉर्ड्स और बातचीत से यह संकेत मिले कि अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है और नियमों का उल्लंघन किया गया हो सकता है।

हालांकि, ऑडियो क्लिप्स में जिन लोगों की आवाज रिकॉर्ड है, उनकी पहचान साफ तौर पर नहीं हो पाई। यानी यह तय नहीं हो सका कि बातचीत में कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसी वजह से अधिकारियों ने कहा कि इन ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच जरूरी है, ताकि आवाज का मिलान कर असली व्यक्तियों की पहचान की जा सके और मामले की सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।

CBI को सौंपी गई आगे की जांच

मामले में सामने आए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे की जांच के लिए CBI को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई। सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए 30 जनवरी 2025 को जारी अपने ऑफिस मेमोरेंडम में साफ कहा कि इस तरह के मामलों की जांच CBI की एंटी-करप्शन ब्रांच द्वारा ही की जानी चाहिए।

CVC का कहना था कि इस केस में सिर्फ सामान्य जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) की गहराई से जांच और ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच जरूरी है। ऐसे तकनीकी और संवेदनशील मामलों की जांच के लिए CBI के पास बेहतर संसाधन और विशेषज्ञता होती है।

इसके बाद AAI के चेयरमैन की मंजूरी ली गई और औपचारिक रूप से यह मामला CBI को सौंप दिया गया। अब CBI इस केस में रिश्वतखोरी, रंगदारी, ब्लैकमेलिंग और पक्षपात जैसे सभी आरोपों की हर एंगल से जांच करेगी। साथ ही, यह भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं और किसकी क्या भूमिका रही है।

एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन ने लगाए आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन के सदस्यों को लगातार परेशान किया जा रहा था। बताया गया कि उन्हें मानसिक रूप से दबाव में रखा जाता था, काम में रुकावटें डाली जाती थीं और कई बार उनके साथ गलत व्यवहार भी किया जाता था, जिससे वे तनाव में रहते थे।

इसके अलावा आरोप है कि यूनियन के सदस्यों से जबरन पैसे वसूले जाते थे। अगर कोई सदस्य पैसे देने से मना करता था, तो उसे डराया-धमकाया जाता था और अलग-अलग तरीकों से ब्लैकमेल करने की कोशिश की जाती थी, ताकि वह दबाव में आकर पैसे देने के लिए मजबूर हो जाए।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारियों ने एक खास लाइसेंसी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को नजरअंदाज किया। आरोप है कि उस कंपनी को काम दिलाने और बाकी लोगों को किनारे करने के लिए पक्षपात किया गया, जिससे अन्य टैक्सी यूनियन सदस्यों को नुकसान उठाना पड़ा।

फॉरेंसिक जांच से खुलेगा राज

विजिलेंस विभाग के मुताबिक, शिकायत के साथ दी गई ऑडियो क्लिप्स इस मामले में अहम सबूत हैं, लेकिन उनमें जिन लोगों की आवाज रिकॉर्ड है, उनकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसलिए इन क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच कराना जरूरी माना गया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स आवाज का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करेंगे और संदिग्ध लोगों की आवाज से उसका मिलान करेंगे, ताकि यह पता चल सके कि बातचीत में शामिल व्यक्ति कौन हैं।

इसके अलावा, मामले में थर्ड पार्टी इन्वेस्टिगेशन भी की जाएगी, यानी बाहरी एजेंसियों और संबंधित लोगों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम को समझा जाएगा। साथ ही पैसों के लेन-देन की भी गहराई से जांच की जाएगी, जिसे मनी ट्रेल कहा जाता है। इसमें यह देखा जाएगा कि पैसे कहां से आए, किसके पास गए और किस-किस के बीच ट्रांजैक्शन हुआ।

इन सभी जांच प्रक्रियाओं का मकसद यह है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके और यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं। इससे जांच एजेंसियों को आरोपियों तक पहुंचने और उनके खिलाफ ठोस सबूत जुटाने में मदद मिलेगी।

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