Thursday , April 9 2026
Breaking News

बॉडी बिल्डर Varinder Ghuman की मौत में हाईकोर्ट का फैसला, नए मेडिकल बोर्ड पर रोक, पूछा-जब पहले ने लापरवाही की पुष्टि की तो दूसरा क्यों?

जालंधर , (PNL) : पंजाब के मशहूर बॉडी बिल्डर वरिंदर घुम्मन की मौत मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा गठित नए मेडिकल बोर्ड की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।

जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि जब पहला बोर्ड लापरवाही की पुष्टि कर चुका है तो दूसरे बोर्ड की जरूरत क्यों पड़ी? कोर्ट ने इस मामले में सरकार से 19 मई, 2026 तक जवाब मांगा है।

बॉडी बिल्डर वरिंदर घुम्मन की अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल में एक सामान्य ऑपरेशन के दौरान हुई मौत का मामला अब कानूनी पेचीदगियों में फंस गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली अस्पताल प्रबंधन और आरोपी डॉक्टरों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर दोबारा जांच बिठाई थी।

दूसरे मेडिकल बोर्ड के गठन को दी थी चुनौती घुम्मन के परिजन भुपिंदर सिंह ने अपनी वकील मेहर सचदेव के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दूसरे मेडिकल बोर्ड के गठन को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब पहले ही एक सात सदस्यीय बोर्ड डॉक्टरों को दोषी ठहरा चुका है तो स्वास्थ्य निदेशक को नया बोर्ड गठित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी सुनवाई के दौरान जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों में दम पाया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब पहले बोर्ड के सात विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच के बाद इलाज में लापरवाही पाई और जिम्मेदार डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक किए, तो सरकार के पास ऐसे कौन से नए तथ्य सामने आए जिसके आधार पर दूसरी बार जांच के आदेश दिए गए?

पहला बोर्ड लापरवाही की पुष्टि कर चुका वहीं, इस मामले पर जानकारी देते हुए वरिंदर के भाई रब्बी ने बताया की हाईकोर्ट ने घुम्मन के मौत मामले में सुनावाई करते कहा की पहला बोर्ड लापरवाही की पुष्टि कर चुका था, तो दूसरे बोर्ड की जरूरत क्यों पड़ी?

क्या है पूरा मामला? बता दें कि, जालंधर के रहने वाले वरिंदर घुम्मन की अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों द्वारा हंगामा किए जाने के बाद सिविल सर्जन ने एक मेडिकल बोर्ड बनाया था। उस बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में चार डॉक्टरों तपिश शुक्ला, अलका तिवारी, राजेंद्र कौल और अरुण कुमार चोपड़ा को इलाज में लापरवाही बरतने का दोषी पाया था।

सुनवाई न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने चारों डॉक्टरों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया था। हालांकि, बाद में डायरेक्टर हेल्थ की ओर से अचानक नया बोर्ड गठित कर उसे 15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया। इस संदिग्ध प्रक्रिया के खिलाफ परिवार पहले सरकार के पास गया, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

पंजाब सरकार के वकील को नोटिस स्वीकार करने का निर्देश हाईकोर्ट ने फिलहाल पंजाब सरकार के वकील को नोटिस स्वीकार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि सरकार अपना पक्ष रखने से पहले जवाब की एक एडवांस कॉपी याचिकाकर्ता को सौंपे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी, तब तक नया मेडिकल बोर्ड कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगा।

About Punjab News Live -PNL

Check Also

जालंधर में साइकिल पर आया चोर:गैस सिलेंडर और 5 हजार नगदी लेकर फरार; चश्मदीद ने देखा, फिर भी नहीं हुआ शक

जालंधर  , (PNL) : जालंधर के चीमा नगर से एक चोर गैस सिलेंडर और 5 हजार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!