कैश मामले में Justice Yashwant Verma ने राष्ट्रपति को भेजा इस्तीफा, चल रही है महाभियोग की कार्यवाही
Punjab News Live -PNL
April 10, 2026
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न्यूज डेस्क, (PNL) : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया है. यह इस्तीफा उन्हें पद से हटाने के लिए चल रही महाभियोग की प्रक्रिया के बीच आया है. पिछले साल उनके दिल्ली स्थित घर से भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ था. 14 मार्च को अधजली भारी मात्रा में नकदी (कैश कांड) मिलने के बाद उनपर महाभियोग की कार्यवाही शुरू की गई. अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 146 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी और 3-सदस्यीय जांच समिति गठित की थी जो जांच कर रही है. कैश बरामद होने वाली घटना के समय वे दिल्ली हाई कोर्ट में जज के तौर पर कार्यरत थे. आरोप है कि यह जला हुआ कैश नौकरों के क्वार्टर के पास बने एक स्टोररूम से बरामद हुआ था. उस समय जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी भोपाल में थे.
कैश मिलने के दावों को बताया था गलत
पिछले साल मार्च में दिल्ली के उनके सरकारी आवास पर अचानक लगी. आग के दौरान उनके घर से बहुत सारे जला हुआ कैश मिलने का आरोप उनपर लगाया गया. कैश मिलने के दावों को गलत बताते हुए, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा की ओर से नियुक्त उस समिति से कहा था कि उस दिन वे राजधानी में मौजूद नहीं थे और अगर अधिकारी उस जगह को सुरक्षित रखने में नाकाम रहे, तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है. ये समिति उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की जांच कर रही है.
जांच के लिए नियुक्त की समिति
20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने प्रस्ताव दिया कि जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद कर दिया जाए. 22 मार्च को सीजेआई ने जज के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया. आंतरिक जांच पैनल ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाया. इसके बाद में आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास भेज दिया गया.
जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आंतरिक जांच की संवैधानिकता को चुनौती दी, लेकिन 7 अगस्त, 2025 को दो जजों की पीठ ने इसे खारिज कर दिया, क्योंकि उन्हें इसमें कोई प्रक्रियात्मक विचलन नहीं मिला. इसके बाद संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पेश किए गए और लोकसभा स्पीकर ने आरोपों की जांच के लिए ‘जजेस (जांच) अधिनियम, 1968’ के तहत एक समिति नियुक्त की.