सुखजिंदर रंधावा बोले- लॉयल-सिंसियर कांग्रेसियों को इग्नोर किया जा रहा:दिल्ली में बैठे लोग डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाए
Punjab News Live -PNL
July 4, 2026
ताजा खबर, पंजाब, लुधियाना
लुधियाना , (PNL) : पंजाब कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक लिस्ट को लेकर मचा घमासान अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। पूर्व उप-मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने हाईकमान की निर्णय लेने की शैली और डैमेज कंट्रोल की अक्षमता पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। रंधावा ने शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के प्रति लॉयल और सिंसियर नेताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता हतोत्साहित हो रहे हैं और विपक्षी दल सोशल मीडिया पर कांग्रेस का मजाक उड़ा रहे हैं।
रंधावा ने दो टूक शब्दों में कहा कि हफ्तों लंबी बैठकें करने और कंट्रोवर्सी खड़ी करने के बजाय पार्टी को पहले ही दिन ‘एक लाइन का स्पष्ट आदेश’ जारी कर देना चाहिए था। हाईकमान को इतनी एक्सरसाइज करने की जरूरत ही नहीं थी।
हाईकमान को देना चाहिए था वन-लाइन ऑर्डर
हालिया सूची पर मचे बवाल और अपनी नाराजगी पर खुलकर बात करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जब तीन-चार दौर की लंबी बैठकें हो चुकी थीं, तो उसके बाद भी ऐसी नाराजगी सामने आना लीडरशिप का सबसे बड़ा फॉल्ट है। उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात हुई, राहुल गांधी ने सभी को अलग-अलग बुलाकर चर्चा की और केसी वेणुगोपाल ने भी कई बार संवाद स्थापित किया। इसके बाद मुझे और चरणजीत सिंह चन्नी को बुलाया गया था। जब इतनी लंबी कवायद के बाद भी वही फैसला करना था, जो चार महीने पहले ही तय हो चुका था और जिस पर सभी ने हस्ताक्षर कर दिए थे, तो इस पूरी एक्सरसाइज की क्या जरूरत थी? हाईकमान को पहले दिन ही कड़ा रुख अपनाते हुए एक लाइन का आदेश जारी करना चाहिए था कि यह हमारा आखिरी फैसला है, जिसे मंजूर है वह रहे, जिसे नहीं मंजूर वह जा सकता है।”
इंदिरा-राजीव की कांग्रेस को याद कर रहे हैं लोग
रंधावा ने कहा कि आज पार्टी के भीतर जो वफादार और सच्चे कांग्रेसी हैं, उन्हें जानबूझकर इग्नोर किया जा रहा है। यही वजह है कि आज लोग इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय की कांग्रेस को याद करते हैं, जब मात्र तीन जनरल सेक्रेटरी पूरी पार्टी को संभाल लेते थे, जबकि आज पदाधिकारियों की फौज होने के बावजूद दिल्ली में बैठे लोग डैमेज कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे चन्नी, राजा वडिंग या ए, बी, सी, डी किसी के भी अध्यक्ष बनने से कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत इस बात से है कि इतनी कंट्रोवर्सी के बाद यह निर्णय लिया गया।
जो हो रहा उसके लिए दिल्ली में बैठे लोग जिम्मेदार
आज जो वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं, उन्हें देखकर हमें खुद शर्म आ रही है। विरोधी हमारा मजाक उड़ा रहे हैं और कार्यकर्ता पूरी तरह टूट चुका है। मैं हमेशा पार्टी के प्रति वफादार रहा हूं; जब राजस्थान में छोटी सी बात होती है, तो मैं तुरंत वहां जाकर स्थिति संभालता हूं।” उन्होंने अंत में कहा कि जिन नेताओं ने अपनी पूरी जिंदगी कांग्रेस को दे दी, नेतृत्व को उनकी बात सुननी चाहिए थी, और आज जो भी नुकसान हो रहा है, उसकी पूरी गलती दिल्ली में बैठे नेतृत्व की है।
सेटिंग करनी होती तो काले शीशे वाली गाड़ी में जाता
केंद्रीय गृहमंत्री से अपनी मुलाकात को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों पर रंधावा ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं थी। उनका गुरदासपुर-पठानकोट का निर्वाचन क्षेत्र सीधे पाकिस्तान बॉर्डर से सटा हुआ है, जहां सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, जिसके बाद पीएम के निर्देश पर ही वे गृहमंत्री से सुरक्षा संबंधी मीटिंग के लिए मिले थे। रंधावा ने तंज कसते हुए कहा, “अगर मुझे कोई राजनीतिक सेटिंग करनी होती, तो मैं सीधे उनके ऑफिस में जाता या फिर काले शीशे वाली गाड़ी में छिपकर जाता।
पार्टी से पहले अपने लोगों के प्रति जवाबदेह
सुखजिंदर रंधावा का कहना है कि मैं पार्टी से पहले अपने उन लोगों के प्रति जवाबदेह हूं जिन्होंने मुझे वोट दिया है। अपने से पहले मुझे उनकी सुरक्षा की चिंता है। उनकी सुरक्षा के लिए गृहमंत्री से मिला। भाजपा नेता तरुण चुग से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि वे पंजाब भाजपा के नेता हैं और बाहर मिले थे; राजनीति में शिष्टाचार के नाते मिलना स्वाभाविक है, अगर सुखबीर बादल भी मिलेंगे तो मैं उनसे भी मिलूंगा।