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लुधियाना ट्रेन हादसे के बाद ICF कोचों में सेफ्टी ड्राइव:7 दिन में होगी जांच, जंग लगे हिस्से तुरंत हटेंगे; POH वर्कशॉप का होगा ऑडिट

लुधियाना , (PNL) : लुधियाना में दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी ट्रेन में शनिवार को हुए हादसे के बाद भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त कदम उठाया है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए रेलवे प्रशासन ने तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।रेलवे द्वारा ICF (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों के लिए एक व्यापक ‘सेफ्टी ड्राइव’ चलाने का फैसला लिया गया है। इस विशेष अभियान के तहत कोचों के उन संवेदनशील हिस्सों पर सबसे ज्यादा फोकस किया जाएगा, जहां जंग लगने की संभावना सबसे अधिक होती है। 7 दिन में सभी कोचों की जांच की जाएगी।

इसी टॉयलेट से धमाके जैसी आवाज आई थी।

इसी टॉयलेट से धमाके जैसी आवाज आई थी।

रेलवे के 7 सूत्रीय एक्शन प्लान को सिलसिलेवार जानिए…

1. एक हफ्ते में सभी कोचों का स्कैन: देशभर में चल रहे सभी ICF कोचों की अगले 1 सप्ताह के भीतर सघन जांच सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी अन्य कोच में संभावित क्रैक का समय रहते पता लगाया जा सके।

2. अत्यधिक जंग लगे हिस्से तुरंत हटेंगे: जांच के दौरान जिन भी कोचों के संवेदनशील हिस्सों में अत्यधिक क्षरण या भारी जंग पाया जाएगा, उन्हें तुरंत प्रभाव से काटकर या मरम्मत करके वहां से हटाया जाएगा।

3. थ्री-लेयर सुपर-चेकिंग: इस सेफ्टी ड्राइव में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। मुख्यालय (HQ), वर्कशॉप और मंडल के वरिष्ठ अधिकारी इन जांचों का ‘सुपर-चेक’ यानी औचक निरीक्षण करेंगे।

4. जागरूक करने के लिए वीडियो जारी: इस चेकिंग अभियान और तकनीकी बारीकियों से संबंधित एक जानकारीयुक्त (इन्फॉर्मेशनल) वीडियो भी क्षेत्रीय रेलवे द्वारा जारी किया गया है, ताकि ग्राउंड स्टाफ को सही तरीके से गाइड किया जा सके।

5. हाई-टेक उपकरणों से होगी जांच: रेलवे के तकनीकी विंग को निर्देश दिए गए हैं कि कोच के उन हिस्सों की जांच के लिए, जहां सामान्य तौर पर नजर नहीं जाती, आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए एंडोस्कोपी कैमरा और लोहे की मोटाई नापने वाले अल्ट्रासोनिक थिकनेस गेज जैसी तकनीकों को अनिवार्य रूप से उपयोग में लाया जाएगा।

6. वर्कशॉप्स का होगा कड़ा ऑडिट: कोचों की पीरियोडिक ओवरहॉलिंग (POH ) करने वाले देश के सभी रेलवे वर्कशॉप का अगले एक महीने के भीतर विस्तृत सेफ्टी और क्वालिटी ऑडिट किया जाएगा।

7. कंडम कोचों को हटाने के लिए आसान होगा SOP: रेलवे अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) को अब और सरल बनाने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जिन कोचों में बहुत ज्यादा जंग लग चुका है या जिनकी मरम्मत की लागत बेहद अधिक आ रही है, उन्हें बिना किसी देरी के अपेक्षाकृत तेजी से कंडम (निरस्त) घोषित कर ट्रैक से बाहर किया जा सके।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि: रेलवे बोर्ड

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, लुधियाना की घटना में समय रहते सुधारात्मक कदम उठा लिए गए थे, जिससे एक बड़ा खतरा टल गया। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पुरानी तकनीक वाले ICF कोचों के बेड़े को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जाए। जब तक इन कोचों को पूरी तरह से आधुनिक एलएचबी (LHB) कोचों से रिप्लेस नहीं कर दिया जाता, तब तक सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लुधियाना रेलवे स्टेशन पर वैष्णो देवी जा रही 1200 यात्रियों से भरी ट्रेन में हादसा हो गया। यहां ट्रेन के स्लीपर कोच का टॉयलेट अचानक धमाके जैसी आवाज के साथ टूट गया। जिसके बाद यह कोच अपने साथ वाले डिब्बे से अलग हो गया। धमाके जैसी आवाज सुनते ही यात्रियों में अफरातफरी मच गई। वह डिब्बे से बाहर आ गए।

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