‘नितिन दे साथी’ ने अनूठे ‘ट्रैश-ए-थॉन’ के जरिए जालंधर में पेश की मिसाल, दशहरा के बाद उसी पार्क में की सफाई, लगाए पौधे, पढ़ें
Punjab News Live -PNL
October 21, 2026
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जालंधर, (PNL) : सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को वास्तविक कार्रवाई में बदलने वाली एक अनूठी पहल के तहत ‘नितिन दे साथी’ ने बुधवार को जालंधर में चौपाटी के पास आदर्श नगर पार्क में ‘ट्रैश-ए-थॉन: द मॉर्निंग आफ्टर दशहरा’ का आयोजन किया। आम आदमी पार्टी के जालंधर सेंट्रल हलका इंचार्ज नितिन कोहली के नेतृत्व में आयोजित इस पहल में युवा स्वयंसेवकों और स्थानीय निवासियों ने सार्वजनिक स्थानों की सफाई करने और पौधारोपण को बढ़ावा देने के लिए हिस्सा लिया। इस पहल ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली संदेश दिया: यदि हम स्वच्छ शहर चाहते हैं, तो हमें किसी और के कदम उठाने का इंतजार करने के बजाय खुद जिम्मेदारी लेनी होगी।
नियमित जागरूकता अभियानों से आगे बढ़ते हुए इस पहल ने प्रतिभागियों को आगे आने और अपने आसपास के वातावरण को बेहतर बनाने में सीधे योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। दशहरे के अगले दिन लोगों को एक साथ लाने की अनूठी सोच ने इस अभियान को खास बनाया। इसने एक बड़े त्योहार के बाद के समय को नागरिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्रवाई के अवसर में बदल दिया।
सुबह की सैर के लिए नियमित रूप से पार्क आने वाले लोग भी इस अभियान में शामिल हुए और उन्होंने इस प्रयास की सराहना की। उनकी भागीदारी ने दिखाया कि सार्थक बदलाव तब शुरू हो सकता है, जब नागरिक, खासकर युवा, उन सार्वजनिक स्थानों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला करते हैं, जिनका वे हर दिन इस्तेमाल करते हैं।

नितिन कोहली ने युवाओं से आरोप-प्रत्यारोप का खेल छोड़ने की अपील की
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए नितिन कोहली ने युवा स्वयंसेवकों, स्थानीय निवासियों और आयोजन टीम को उनके उत्साह और प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने इस विचार को व्यावहारिक कार्रवाई में बदलने के लिए टीम की सराहना की और कहा कि इस तरह की पहल समाज को बेहतर बनाने में युवाओं की रचनात्मक भूमिका को दर्शाती हैं।
नितिन कोहली ने कहा, “मैं इस अनूठी पहल की शुरुआत करने वाली पूरी आयोजन टीम को बधाई देता हूं और उन सभी युवा स्वयंसेवकों तथा स्थानीय निवासियों का धन्यवाद करता हूं, जो योगदान देने के लिए आगे आए। इस प्रयास की असली ताकत इसके संदेश में है। हम अक्सर कचरे, गंदगी और सार्वजनिक स्थानों की खराब स्थिति को लेकर शिकायत करते हैं, लेकिन हमें खुद से यह सवाल भी पूछना चाहिए कि इन्हें बेहतर बनाने के लिए हम क्या कर रहे हैं।
“हमारे युवाओं को जिम्मेदारी अपने हाथों में लेनी चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप के खेल में उलझने और हर समस्या के समाधान के लिए किसी और का इंतजार करने के बजाय हमें आगे आकर समाधान का हिस्सा बनना चाहिए। सरकारी एजेंसियों और सफाई कर्मचारियों की अपनी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन नागरिकों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। जब हम मिलकर काम करते हैं, तो एक छोटी-सी पहल भी सार्थक प्रभाव पैदा कर सकती है।”
उन्होंने कहा कि यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि एक नया और रचनात्मक विचार लोगों को किसी सामाजिक उद्देश्य में भाग लेने के लिए प्रेरित कर सकता है, बजाय इसके कि वे केवल समस्याओं पर चर्चा तक सीमित रहें। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, विचारों और उत्साह को ऐसे कार्यों की दिशा में लगाया जाना चाहिए, जो व्यापक समुदाय के लिए लाभदायक हों।
एक शुरुआत, न कि एक दिन का अभियान
इस पहल को अन्य समुदायों के लिए एक उदाहरण बनाने पर जोर देते हुए नितिन कोहली ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल स्वच्छता अभियान आयोजित करना नहीं था, बल्कि अधिक से अधिक नागरिकों को अपने-अपने इलाकों में इसी तरह के कदम उठाने के लिए प्रेरित करना था।
उन्होंने कहा, “यह एक पहल, एक अनुभव और एक बड़े लक्ष्य की दिशा में उठाया गया एक छोटा-सा कदम था। लोगों को इससे प्रेरणा लेकर अपने मोहल्लों, पार्कों और स्थानीय इलाकों में इसी तरह की गतिविधियां आयोजित करनी चाहिए। हर क्षेत्र की अपनी चुनौतियां होती हैं और स्थानीय निवासी अक्सर उन चुनौतियों की पहचान करने तथा व्यावहारिक समाधान के लिए मिलकर काम करने की सबसे बेहतर स्थिति में होते हैं।
“हमें आरोप-प्रत्यारोप के खेल से बाहर निकलकर ऐसी संस्कृति विकसित करनी होगी, जिसमें लोग अपने आसपास के वातावरण की जिम्मेदारी लें। यदि हर इलाका इस तरह की एक भी पहल करता है, तो सामूहिक रूप से इसका प्रभाव कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। इसका उद्देश्य यह नहीं है कि हर कोई हमारा या किसी एक संगठन का इंतजार करे। उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक लोग आगे आएं, जिम्मेदारी उठाएं और जहां वे रहते हैं, वहां बदलाव लाएं।”
इस अभियान ने समुदाय के नेतृत्व में होने वाली कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया और दिखाया कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई पहल दूसरे मोहल्लों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। आयोजकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह प्रयास अधिक युवाओं और निवासियों को अपने-अपने क्षेत्रों में इसी तरह के कार्यक्रम शुरू करने के लिए प्रेरित करेगा।
दशहरे के बाद की अनूठी सोच ने जागरूकता को कार्रवाई में बदला
‘ट्रैश-ए-थॉन: द मॉर्निंग आफ्टर दशहरा’ के समय और इसकी अवधारणा ने इस अभियान को एक अलग पहचान दी। उत्सव तक ही ध्यान सीमित रखने के बजाय इस पहल ने नागरिकों को त्योहार के बाद सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान के साथ पौधारोपण को भी शामिल किया गया, जिससे तत्काल कार्रवाई के साथ-साथ हरित वातावरण के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी बढ़ावा मिला। स्वयंसेवकों ने आदर्श नगर पार्क के आसपास के क्षेत्र को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया, जबकि सुबह की सैर करने वालों की भागीदारी ने साझा सार्वजनिक स्थानों के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी के महत्व को और मजबूत किया।
इस पहल ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिक जिम्मेदारी किसी खास अवसर या अभियान तक सीमित नहीं है। पार्कों को साफ रखना, कचरे का उचित निपटान करना और हरियाली की रक्षा करना व्यक्तियों तथा समुदायों के निरंतर प्रयासों की मांग करता है।
‘नितिन दे साथी’ की आगे और सामुदायिक पहल करने की योजना
आयोजन टीम ने आने वाले दिनों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और अन्य सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित और कार्यक्रम आयोजित करने की योजनाओं की घोषणा की।
इसका उद्देश्य ट्रैश-ए-थॉन के अनुभव को आगे बढ़ाना और इस प्रयास को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय लोगों की निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। अधिक युवाओं और स्थानीय निवासियों को शामिल करके ‘नितिन दे साथी’ सक्रिय नागरिकता की ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहता है, जिसमें समुदाय स्थानीय समस्याओं की पहचान करें और उन्हें हल करने के लिए मिलकर काम करें।
आयोजकों ने जोर देकर कहा कि इस पहल को एक ऐसे उदाहरण के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसे दूसरे लोग अपने-अपने इलाकों के अनुसार अपनाकर दोहरा सकते हैं। इसका व्यापक उद्देश्य लोगों को केवल शिकायतें करने के बजाय रचनात्मक कार्रवाई के लिए प्रेरित करना और नागरिक भागीदारी को सामुदायिक जीवन का नियमित हिस्सा बनाना है।
पहल से जुड़े स्वयंसेवक
इस अवसर पर ख्याति कोहली, राकेश बेहल, सागर वालिया, गरविता कोहली, अंजलि बेहल, रिजुल कोहली, सिमरिता उप्पल, आकृति अरोड़ा, मोंटी मागो, सिमरदीप सिंह उप्पल, रिशव सहोता, नेहमत, आराध्या कोहली, जसकीरत, रोहन कोहली, अनुष मार्टिन, अनिरुद्ध मुर्रिया, आगमन बत्रा, नीरज शुभ, सनिध्या कोहली, ऋषभ जैन, मनप्रीत कौशल, शोभित खन्ना, कशिश गुप्ता, शौर्य कोहली और शुभकर्मन सिंह उपस्थित थे।
इस पहल के माध्यम से ‘नितिन दे साथी’ नागरिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने और अधिक लोगों को सामाजिक तथा पर्यावरण संबंधी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहता है। आयोजकों ने कहा कि इस अनुभव से दूसरे समुदायों को भी इसी तरह के प्रयास शुरू करने और रोजमर्रा की नागरिक समस्याओं के लिए स्थानीय स्तर पर समाधान विकसित करने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।
ट्रैश-ए-थॉन का संदेश स्पष्ट था: केवल शिकायतों से स्वच्छ शहर नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए ऐसे नागरिकों की जरूरत है, जो जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हों, ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो विचारों को कार्रवाई में बदलें, और ऐसे समुदायों की जरूरत है, जो आरोप-प्रत्यारोप के बजाय भागीदारी को चुनें। जालंधर में एक पहल के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास उन मोहल्लों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जो व्यावहारिक रूप से बदलाव लाना चाहते हैं।